कुत्तों का सामाजिक व्यवहार: मनुष्यों की निस्वार्थ सहायता और बच्चों से उनकी समानता

द्वारा संपादित: Katerina S.

कुत्तों का सामाजिक व्यवहार: मनुष्यों की निस्वार्थ सहायता और बच्चों से उनकी समानता-1

बुडापेस्ट स्थित इओट्वोस लोरैंड विश्वविद्यालय (Eötvös Loránd University) के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए व्यवहार संबंधी शोध ने कुत्तों और छोटे बच्चों में निस्वार्थ सहायता की प्रवृत्तियों के बीच एक महत्वपूर्ण समानता का खुलासा किया है। इसके विपरीत, बिल्लियाँ ऐसी स्थितियों में अधिक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाती हैं। HUN-REN–ELTE के विशेषज्ञों सहित शोध दल ने सहज सामाजिक व्यवहार का आकलन करने के लिए एक प्रयोगात्मक ढांचा तैयार किया, जिसका उद्देश्य बिना किसी प्रत्यक्ष पुरस्कार की अपेक्षा के दूसरों की भलाई के लिए कार्य करना था। इस अध्ययन के निष्कर्ष 'एनिमल बिहेवियर' (Animal Behaviour) पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं, जो जानवरों के व्यवहार और मनोविज्ञान पर नई रोशनी डालते हैं।

इस शोध के दौरान, वैज्ञानिकों ने 16 से 24 महीने की आयु के 20 बच्चों, 40 कुत्तों और 27 बिल्लियों की प्रतिक्रियाओं का सूक्ष्मता से अवलोकन किया। बच्चों के लिए इस विशिष्ट आयु वर्ग का चयन इसलिए किया गया ताकि पालतू प्रजातियों के साथ सटीक और प्रासंगिक तुलना की जा सके, क्योंकि यह मानवीय सामाजिकता के विकास का एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक चरण होता है। प्रयोग के दौरान एक ऐसी स्थिति बनाई गई जहाँ एक वयस्क व्यक्ति, जो पालतू जानवर का मालिक या बच्चे का माता-पिता था, किसी छिपी हुई वस्तु, जैसे कि स्पंज, को खोजने का प्रयास कर रहा था। मुख्य शर्त यह थी कि व्यक्ति हताशा और कठिनाई के संकेत तो दे रहा था, लेकिन उसने जानवर या बच्चे से सीधे मदद के लिए कोई अनुरोध नहीं किया। शोधकर्ताओं ने यह बारीकी से नोट किया कि क्या प्रतिभागी वस्तु के स्थान की ओर इशारा करके, उसके पास जाकर या उसे लाकर मदद के लिए आगे आते हैं।

अध्ययन के परिणामों से पता चला कि 75% से अधिक कुत्तों और बच्चों ने सहायता की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लिया। यह दूसरों की मदद करने के प्रति उनकी एक मजबूत आंतरिक प्रेरणा को दर्शाता है, भले ही वह वस्तु उनके लिए व्यक्तिगत रूप से किसी काम की न हो। इसके विपरीत, बिल्लियों ने ऐसी स्थितियों में शायद ही कभी हस्तक्षेप किया, जब तक कि उनका कोई स्पष्ट व्यक्तिगत लाभ न जुड़ा हो। शोधकर्ताओं ने पाया कि बिल्लियाँ अक्सर केवल दूर से अवलोकन करने या छिपने की जगह की ओर देखने तक ही सीमित रहीं। हालांकि, जब छिपी हुई वस्तु भोजन या खिलौने जैसी कोई आकर्षक चीज थी, तो व्यवहार में यह अंतर पूरी तरह समाप्त हो गया। ऐसी स्थिति में बिल्लियाँ भी कुत्तों की तरह ही सक्रिय हो गईं और वस्तु के स्थान की ओर इशारा करने लगीं। इससे यह स्पष्ट होता है कि बिल्लियों के लिए किसी खोज में शामिल होना उनके अपने स्वार्थ और रुचि से गहराई से जुड़ा हुआ है।

शोधकर्ता इन व्यवहारिक प्रतिमानों को प्रजातियों के विकासवादी इतिहास और उनके क्रमिक विकास से जोड़कर देखते हैं। कुत्तों ने सदियों से एक लंबी चयन प्रक्रिया का अनुभव किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य मानवीय सामाजिक संकेतों और सहयोग के प्रति उनकी संवेदनशीलता को बढ़ाना था। यह प्रक्रिया संभवतः पाषाण युग (Stone Age) से ही शुरू हो गई थी जब मनुष्यों और कुत्तों ने साथ रहना शुरू किया था। इओट्वोस लोरैंड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पीटर पोंगराज (Péter Pongrácz) इस बात पर जोर देते हैं कि कुत्ते कुछ हद तक छोटे बच्चों के समान व्यवहार करते हैं क्योंकि वे मानवीय देखभाल और सुरक्षा पर अत्यधिक निर्भर होते हैं। इसके विपरीत, बिल्लियों ने अपने उन गुणों को बरकरार रखा है जो उनके एकांत शिकारी पूर्वजों में पाए जाते थे। 18-24 महीने के बच्चों के साथ की गई यह तुलना इस बात की पुष्टि करती है कि कुत्ते मनुष्यों के साथ सहयोग के मामले में विकास के एक उच्च स्तर पर हैं, जैसा कि एडम मिक्लोसी (Ádám Miklósi) जैसे प्रसिद्ध वैज्ञानिकों के शोध कार्यों में भी रेखांकित किया गया है।

निष्कर्ष के तौर पर, यह अध्ययन इस बात की पुष्टि करता है कि कुत्तों में देखी जाने वाली मदद करने की सहज इच्छा एक गहरी जड़ें जमा चुकी विशेषता है, जो मानवीय परोपकार के शुरुआती रूपों के समान है। यह उनके पालतू बनाने के अनूठे विकासवादी मार्ग और मनुष्यों के साथ उनके सह-अस्तित्व का परिणाम है। ये परिणाम पर्यावरण और मनुष्यों के साथ अंतःक्रिया की उन जन्मजात रणनीतियों का प्रतिबिंब हैं जो समय के साथ विकसित हुई हैं। यह शोध न केवल जानवरों के मनोविज्ञान की हमारी समझ को गहरा करता है, बल्कि यह भी बताता है कि क्यों कुत्ते सदियों से मनुष्यों के सबसे करीबी और भरोसेमंद साथी बने हुए हैं।

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स्रोतों

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  • RAND Corporation

  • La Razón

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