चीन के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार प्रतिनिधि और वाणिज्य उप मंत्री, ली चेंगगैंग, ने 27 से 29 अगस्त, 2025 तक वाशिंगटन डी.सी. का दौरा किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय आर्थिक और व्यापारिक संबंधों पर महत्वपूर्ण चर्चा करना था। यह यात्रा कनाडा की यात्रा के बाद हुई, जहाँ ली चेंगगैंग ने चीन-कनाडा संयुक्त आर्थिक और व्यापार समिति की सह-अध्यक्षता की थी।
वाशिंगटन में, ली चेंगगैंग ने अमेरिकी ट्रेजरी विभाग, वाणिज्य विभाग और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इन वार्ताओं में पूर्व समझौतों के कार्यान्वयन की समीक्षा, मतभेदों को सुलझाने के लिए समान संवाद और सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया गया। एक अमेरिकी सरकारी प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यह यात्रा किसी औपचारिक बातचीत का हिस्सा नहीं थी, बल्कि अनौपचारिक बातचीत और संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई थी।
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब चीन और अमेरिका के बीच टैरिफ विराम, जो मई 2025 में तय हुआ था और जिसे जून और जुलाई में बढ़ाया गया था, नवंबर 2025 तक जारी रहने की उम्मीद है। इस विराम का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव को कम करना है। चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि चीन अमेरिका के साथ मिलकर द्विपक्षीय आर्थिक और व्यापार परामर्श तंत्र का प्रभावी ढंग से उपयोग करने, समान संवाद के माध्यम से मुद्दों को हल करने और चीन-अमेरिका आर्थिक व व्यापारिक संबंधों के स्थिर, स्वस्थ और सतत विकास को संयुक्त रूप से बनाए रखने के लिए तैयार है।
यह यात्रा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच चल रहे आर्थिक संवाद को रेखांकित करती है। टैरिफ विराम ने आपूर्ति श्रृंखलाओं में कुछ हद तक स्थिरता लाई है, लेकिन भविष्य में इन संबंधों का स्वरूप क्या होगा, यह देखना बाकी है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के संवाद, भले ही वे औपचारिक बातचीत न हों, भविष्य में अधिक व्यापक समझौतों के लिए आधार तैयार कर सकते हैं। यह दर्शाता है कि कूटनीतिक प्रयास और आपसी समझ, चाहे वह कितनी भी नाजुक क्यों न हो, वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक हैं।