दक्षिण फ्रांस में डायनासोर के घोंसलों का अभूतपूर्व ठिकाना मिला, हजारों जीवाश्म अंडे बरामद
द्वारा संपादित: Tatyana Hurynovich
फ्रांस के दक्षिणी हिस्से में स्थित विभाग हेरो (Hérault) के अंतर्गत आने वाले मेज़ (Mèze) कम्यून में जीवाश्म विज्ञानियों की टीमों ने एक ऐसी खोज दर्ज की है जिसे वैज्ञानिक जगत में असाधारण माना जा रहा है। यहाँ डायनासोर के घोंसलों का एक अत्यंत विस्तृत क्षेत्र मिला है, जिसमें सैकड़ों और प्रारंभिक वैज्ञानिक अनुमानों के अनुसार संभावित रूप से हजारों की संख्या में जीवाश्म अंडे मौजूद हैं जो आश्चर्यजनक रूप से सुरक्षित अवस्था में हैं। डायनासोर की प्रजनन रणनीतियों और उनके व्यवहार को समझने के लिए वैश्विक महत्व रखने वाली इस खोज की आधिकारिक घोषणा मेज़ डायनासोर म्यूजियम-पार्क (Dinosaur Museum-Park of Mèze) द्वारा वर्ष 2026 की शुरुआत में की गई थी। इस विशिष्ट स्थल पर गहन उत्खनन कार्य अक्टूबर 2025 में आरंभ हुआ था, जिसमें अब तक कई सौ जीवाश्म सफलतापूर्वक निकाले जा चुके हैं। शोधकर्ताओं का दृढ़ विश्वास है कि अंडों से भरी यह भूगर्भीय परत वर्तमान खुदाई क्षेत्र की सीमाओं से काफी आगे तक फैली हुई है, जो भविष्य में हजारों और अंडों के मिलने के पूर्वानुमान को पुख्ता करती है।
इन दुर्लभ जीवाश्मों की आयु लगभग 72 मिलियन वर्ष आंकी गई है, जो कि पृथ्वी के इतिहास के लेट क्रेटेशियस काल (Late Cretaceous period) से मेल खाती है। इस खोज की महत्ता केवल अंडों की भारी संख्या और उनके घनत्व में ही नहीं है, बल्कि स्वयं अंडों के संरक्षण की गुणवत्ता भी विशेषज्ञों को चकित कर रही है। प्राप्त हुए कुछ नमूनों में आंतरिक संरचनाएं इतनी सुरक्षित हैं कि वे भ्रूण विज्ञान (embryology) और टैफ़ोनॉमी (taphonomy) के गहन अध्ययन के लिए अभूतपूर्व अवसर प्रदान करती हैं, हालांकि वर्तमान चरण में भ्रूणों की उपस्थिति की आधिकारिक पुष्टि होना अभी शेष है। वैज्ञानिकों का एक समूह यह परिकल्पना प्रस्तुत कर रहा है कि प्राचीन काल में इस क्षेत्र में स्थित बाढ़ के मैदान में अचानक आई जल-प्रलय ने इन घोंसलों को गाद और मिट्टी की मोटी परतों के नीचे तुरंत दफन कर दिया होगा। इसी त्वरित दफन प्रक्रिया ने इन नाजुक अवशेषों को बाहरी क्षरण से बचाकर लाखों वर्षों तक सुरक्षित रखा।
प्रारंभिक वैज्ञानिक विश्लेषणों से यह संकेत मिलता है कि यहाँ पाए गए अधिकांश गोलाकार अंडे टाइटानोसॉर (Titanosaurs) प्रजाति के थे, जो उस युग के सबसे विशाल और प्रभावशाली शाकाहारी जीव माने जाते थे। हालांकि, अंडों के विभिन्न आकारों और उनकी बनावट में विविधता को देखते हुए शोधकर्ताओं का मानना है कि यह स्थल केवल एक प्रजाति तक सीमित नहीं था, बल्कि यहाँ एंकिलोसॉर (ankylosaurs) और छोटे थेरोपोड (theropods) जैसे अन्य डायनासोर भी अपने घोंसले बनाया करते थे। उल्लेखनीय है कि इसी भौगोलिक क्षेत्र में पहले भी 'रैबडोडोन प्रिस्कस' (Rhabdodon priscus) नामक शाकाहारी डायनासोर के अवशेष मिल चुके हैं, जो लगभग 72 से 69 मिलियन वर्ष पहले यूरोप के जंगलों में विचरण करते थे। इसके अतिरिक्त, वैज्ञानिक उन अंडों की संभावना की भी जांच कर रहे हैं जो पूर्व में वर्णित लंबे 'ओओविड' (oovid) 'प्रिस्मेटूलिथस कैबोटी' (Prismatoolithus caboti) की श्रेणी में आते हैं, जिनका संबंध ट्रूडोंटिड्स (troodontids) परिवार से माना जाता है।
मेज़ डायनासोर म्यूजियम-पार्क, जो वर्तमान में डायनासोर के विषय पर आधारित यूरोप का सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित संग्रहालय है, वास्तव में इसी महत्वपूर्ण पुरापाषाण स्थल के ऊपर विकसित किया गया है। इस ऐतिहासिक स्थल की पहली पहचान लगभग तीस साल पहले संग्रहालय के वर्तमान निदेशक और क्यूरेटर एलेन कैबोट (Alain Cabot) द्वारा की गई थी। मार्च 1996 में यहाँ बड़ी संख्या में अंडों की पहली बड़ी खेप मिलने के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस स्थल को गोबी रेगिस्तान और अमेरिका के मोंटाना राज्य के बाद दुनिया के तीसरे सबसे महत्वपूर्ण डायनासोर प्रजनन स्थल के रूप में मान्यता दी गई थी। आगामी कई वर्षों तक इस स्थल पर निरंतर शोध और उत्खनन कार्य जारी रखने की योजना बनाई गई है, जो इस स्थान की अपार वैज्ञानिक संभावनाओं को दर्शाता है। यह खोज न केवल फ्रांस बल्कि पूरे दक्षिणी यूरोप की लेट क्रेटेशियस पैलियोइकोलॉजी को फिर से समझने और उसे नए सिरे से परिभाषित करने के लिए एक महत्वपूर्ण आधार स्तंभ बनेगी।
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स्रोतों
Newsweek
La Gazette de Montpellier
Valeurs actuelles
Le Bonbon
InfOccitanie
Musée-Parc des Dinosaures et de la Préhistoire Mèze
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