गिनी में 21 सितंबर, 2025 को एक महत्वपूर्ण संवैधानिक जनमत संग्रह हुआ, जिसने देश के राजनीतिक भविष्य को आकार देने की दिशा में एक नया मोड़ लिया। इस जनमत संग्रह के प्रस्तावों में राष्ट्रपति के कार्यकाल को पांच से बढ़ाकर सात साल करना और सैन्य कर्मियों को चुनाव लड़ने की अनुमति देना शामिल है। यह कवायद सैन्य जुंटा के शासन में हो रही है, जिसका नेतृत्व जनरल मामदी डौम्बोया कर रहे हैं। जुंटा पर राजनीतिक स्वतंत्रता को प्रतिबंधित करने और देश को नागरिक शासन में वापस लाने की समय-सीमाओं को पूरा न करने के आरोप लगते रहे हैं।
जनमत संग्रह के तहत प्रस्तावित संविधान में राष्ट्रपति के कार्यकाल को सात साल तक बढ़ाने का प्रावधान है, जिसे एक बार फिर नवीनीकृत किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, यह सैन्य सदस्यों को चुनाव में भाग लेने की अनुमति देता है। एक सीनेट का भी गठन प्रस्तावित है, जिसके एक तिहाई सदस्यों की नियुक्ति सीधे राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी। यह कदम देश के राजनीतिक परिदृश्य को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है, खासकर जनरल डौम्बोया की भविष्य की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के संबंध में। आलोचकों का मानना है कि ये संशोधन जुंटा के शासन को वैधता प्रदान करने और डौम्बोया को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने का मार्ग प्रशस्त करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। दूसरी ओर, समर्थक इन सुधारों को राष्ट्रीय विकास और स्थिरता के लिए आवश्यक बताते हैं।
इस जनमत संग्रह की प्रक्रिया पर कई सवाल उठाए गए हैं। प्रमुख विपक्षी दलों, जैसे कि यूनियन ऑफ डेमोक्रेटिक फोर्सेज ऑफ गिनी (UFDG) और रैली ऑफ द गिनी पीपुल (RPG) को तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है, जिससे राजनीतिक माहौल में तनाव बढ़ गया है। मानवाधिकार संगठनों ने राजनीतिक विरोधियों के गायब होने और मीडिया आउटलेट्स के मनमाने निलंबन का आरोप लगाया है, हालांकि सरकार ने इन आरोपों से इनकार किया है और जांच का वादा किया है। अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने भी राजनीतिक प्रतिबंधों के कारण प्रक्रिया की समावेशिता और पारदर्शिता पर चिंता व्यक्त की है।
गिनी में 2021 के तख्तापलट के बाद से, पश्चिम और मध्य अफ्रीका में आठ तख्तापलट हुए हैं, जिसने क्षेत्रीय राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया है। इस संदर्भ में, गिनी का जनमत संग्रह सैन्य-शासित सरकारों द्वारा अपने शासन को वैध बनाने के नवीनतम प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। जनमत संग्रह के परिणाम आने वाले दिनों में अपेक्षित हैं। इस बीच, देश के नागरिक शासन में वापसी की राह पर है, लेकिन यह प्रक्रिया राजनीतिक प्रतिबंधों और विपक्षी दलों के बहिष्कार के कारण विवादों में घिरी हुई है। 6.7 मिलियन योग्य मतदाताओं में से, जनमत संग्रह को पारित होने के लिए कम से कम 50% मतदान की आवश्यकता है। इस जनमत संग्रह के परिणाम गिनी के राजनीतिक और आर्थिक भविष्य के साथ-साथ पश्चिम अफ्रीकी क्षेत्र में लोकतांत्रिक संक्रमण के लिए भी महत्वपूर्ण होंगे। यह देखना बाकी है कि क्या यह जनमत संग्रह देश में स्थिरता और प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेगा या राजनीतिक अनिश्चितता को और बढ़ाएगा।



