सियाचिन ग्लेशियर में हिमस्खलन: तीन बहादुर जवानों की शहादत
द्वारा संपादित: Tetiana Martynovska 17
सियाचिन ग्लेशियर, जिसे 'दुनिया का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र' भी कहा जाता है, एक बार फिर दुखद घटना का गवाह बना है। 9 सितंबर, 2025 को, लगभग 20,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित एक बेस कैंप में हिमस्खलन की चपेट में आने से भारतीय सेना के तीन वीर जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। यह घटना काराकोरम रेंज में नियंत्रण रेखा (LoC) के उत्तरी किनारे पर स्थित बेस कैंप में तड़के सुबह हुई।
इस बर्फीले इलाके की दुर्गम परिस्थितियाँ और अत्यधिक मौसम की मार हमेशा तैनात सैनिकों के लिए गंभीर खतरे पैदा करती हैं। बचाव अभियान तुरंत शुरू कर दिए गए थे, जिसमें विशेष हिमस्खलन बचाव दल और सेना के हेलीकॉप्टर शामिल थे। ये दल अत्यधिक ठंड और ऊंचाई की चुनौतियों का सामना करते हुए, व्यापक खोज और बचाव कार्यों को सुनिश्चित करने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। सियाचिन ग्लेशियर, जो पूर्वी काराकोरम रेंज में स्थित है, अपनी चरम जलवायु के लिए जाना जाता है, जहाँ तापमान अक्सर माइनस 60 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। इस क्षेत्र में हिमस्खलन और भूस्खलन आम बात है, खासकर सर्दियों के महीनों के दौरान।
भारतीय सेना रणनीतिक ऊंचाइयों को सुरक्षित रखने के लिए इस क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति बनाए हुए है, जो 1984 से जारी एक मिशन है। इस दुखद घटना में शहीद होने वाले जवानों में सेपॉय मोहित कुमार (उत्तर प्रदेश के औरैया से), अग्निवीर डाभी राकेश देवभाई (गुजरात के जूनागढ़ से) और अग्निवीर नीरज कुमार चौधरी (झारखंड के देवघर से) शामिल हैं। सेना के फायर एंड फ्यूरी कोर ने उनके सर्वोच्च बलिदान को नमन किया है और उनके परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।
यह घटना सियाचिन में सैनिकों द्वारा सामना किए जाने वाले निरंतर खतरों को रेखांकित करती है, जहाँ मौसम और भूभाग अक्सर दुश्मन की गोलीबारी से भी बड़े दुश्मन साबित होते हैं। पिछले कुछ वर्षों में भी इस क्षेत्र में कई हिमस्खलन की घटनाएं हुई हैं, जिनमें सैनिकों की जान गई है, जैसे कि 2021 में दो सैनिकों की मृत्यु और 2019 में चार सैनिकों और दो पोर्टरों की जान लेने वाला हिमस्खलन। सियाचिन में भारतीय सेना की उपस्थिति 13 अप्रैल, 1984 को 'ऑपरेशन मेघदूत' के साथ शुरू हुई थी, जिसने पाकिस्तान के प्रयासों को विफल करते हुए ग्लेशियर पर भारत का पूर्ण नियंत्रण स्थापित किया था। तब से, यह क्षेत्र भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बिंदु बना हुआ है, लेकिन साथ ही यह हमारे बहादुर सैनिकों के लिए एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण वातावरण भी है। इन वीर जवानों का सर्वोच्च बलिदान राष्ट्र के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
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स्रोतों
Greater Kashmir
Al Jazeera
The Indian Express
The Hindu
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