आगामी 2025-2026 की सर्दियों में यूरोप में ला नीना की स्थिति का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। ला नीना, अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) का एक ठंडा चरण है, जो प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान को प्रभावित करता है और वैश्विक मौसम पैटर्न को बदल देता है। नवीनतम पूर्वानुमानों के अनुसार, इस सर्दी में यूरोप के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बर्फबारी की उम्मीद है, हालांकि स्कैंडिनेविया और यूनाइटेड किंगडम के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बर्फबारी हो सकती है।
नवंबर में कुल मिलाकर कम बर्फबारी की संभावना है, जबकि स्कैंडिनेविया के ऊंचे इलाकों में अधिक बर्फ गिर सकती है। दिसंबर में भी यही प्रवृत्ति जारी रहने की उम्मीद है, लेकिन मध्य बाल्कन, दक्षिणी यूके और स्कैंडिनेविया के कुछ हिस्सों में भारी बर्फबारी हो सकती है। जनवरी में, उत्तरी यूरोप में उच्च दबाव के कारण ठंडी हवा का प्रवाह बढ़ सकता है, जिससे यूके और मध्य यूरोप में बर्फबारी की संभावना बढ़ सकती है।
दूसरी ओर, यूके मेट ऑफिस (UKMO) का पूर्वानुमान थोड़ा अलग है। यह मॉडल महाद्वीप के अधिकांश हिस्सों के लिए सामान्य से काफी कम बर्फबारी की भविष्यवाणी करता है, सिवाय उत्तरी भागों के। यह मॉडल गर्म मौसम की भविष्यवाणी के लिए जाना जाता है और यूरोप के लिए एक हल्की सर्दी का संकेत देता है।
ला नीना के प्रभाव से यूरोप में सर्दियों के मौसम में भिन्नता देखने को मिल सकती है। कुछ क्षेत्रों में, जैसे कि स्कैंडिनेविया और यूके के कुछ हिस्से, अधिक बर्फबारी और ठंडे मौसम की उम्मीद है। वहीं, अन्य क्षेत्रों में, विशेष रूप से महाद्वीप के दक्षिणी हिस्सों में, मौसम हल्का रह सकता है। यह भिन्नता ध्रुवीय भंवर (Polar Vortex) और उत्तरी अटलांटिक दोलन (NAO) जैसे अन्य जलवायु कारकों के साथ ला नीना की परस्पर क्रिया के कारण हो सकती है। ये कारक मिलकर यूरोप में मौसम के पैटर्न को और अधिक जटिल बना सकते हैं, जिससे कुछ क्षेत्रों में अचानक ठंड बढ़ सकती है या फिर अप्रत्याशित तूफान आ सकते हैं।
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि ला नीना का प्रभाव दिसंबर से फरवरी तक सबसे अधिक महसूस किया जाएगा। हालांकि, इस बात पर भी जोर दिया गया है कि ये केवल प्रारंभिक पूर्वानुमान हैं और मौसम की स्थिति बदल सकती है। इसलिए, नवीनतम मौसम अपडेट पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा।



