भारतीय राज्य तमिलनाडु में, पोलाची क्षेत्र के निकट अनामलाई टाइगर रिजर्व (एटीआर) की पारिस्थितिकी तंत्र में, वैज्ञानिकों ने वनस्पति जगत की एक ऐसी प्रजाति का आधिकारिक तौर पर दस्तावेजीकरण किया है जो पहले अज्ञात थी। इस प्रजाति का नाम *Afrohybanthus mahalingamii* रखा गया है। यह खोज भारतीय वनस्पति संपदा में एक महत्वपूर्ण वृद्धि मानी जा रही है। इस नए फ्लोरा की औपचारिक घोषणा 30 अक्टूबर 2025 को अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका *फाइटोटैक्सा* (*Phytotaxa*) में प्रकाशित हुई थी, जो इस क्षेत्र की पारिस्थितिक प्रणालियों की विशाल और अभी तक पूरी तरह से न खोजी गई समृद्धि को उजागर करती है।
इस महत्वपूर्ण शोध दल का नेतृत्व एनजीएम कॉलेज (NGM College), पोलाची के वनस्पति विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ए. सरवलिंगम ने किया। टीम ने अनामलाई पहाड़ियों की तलहटी में स्थित पोलाची जिले की परित्यक्त और कृषि भूमि में इस प्रजाति की सफलतापूर्वक पहचान की। डॉ. सरवलिंगम के साथ इस टीम में आर. रामासुब्बू, ए. बेचू पुन्नन और च. मेनका के अलावा वनस्पति विज्ञान के अंतिम वर्ष के छात्र भी शामिल थे। इस नई प्रजाति, *Afrohybanthus mahalingamii*, का नामकरण परोपकारी और एनजीएम कॉलेज के संस्थापक दिवंगत अरुत्चेलवर डॉ. एन. महालिंगम के सम्मान में किया गया है। इस खोज के साथ, भारत में अब *Afrohybanthus* जीनस की कुल सात (7) प्रजातियाँ दर्ज हो गई हैं।
रूपात्मक विशेषताओं (Morphological characteristics) के आधार पर, यह नई प्रजाति एक छोटा, सघन रूप से शाखित शाकीय पौधा है, जो कई विशिष्ट लक्षणों के कारण अपने निकट संबंधी प्रजातियों से स्पष्ट रूप से भिन्न है। इसके प्रमुख पहचान चिह्नों में घने बालों वाला (hirsute) तना, विपरीत-अंडाकार या विपरीत-दीर्घवृत्ताकार पत्तियां शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, इसमें *Afrohybanthus enneaspermus* (L.) Flicker की तुलना में कैप्सूल में बीजों की संख्या भी अधिक पाई जाती है। यह पौधा विशेष रूप से जून से दिसंबर की अवधि के दौरान फूलता और फल देता है।
इसके वैज्ञानिक मूल्य के बावजूद, *Afrohybanthus mahalingamii* को अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) के मानदंडों के अनुसार तुरंत **गंभीर रूप से लुप्तप्राय (Critically Endangered, CR)** श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है। संरक्षण की यह अत्यंत आवश्यक श्रेणी इस प्रजाति के अत्यंत सीमित वितरण क्षेत्र के कारण निर्धारित की गई है। यह वर्गीकरण तमिलनाडु की इस अनूठी प्राकृतिक विरासत की सुरक्षा और संरक्षण की तत्काल आवश्यकता पर बल देता है।
तमिलनाडु राज्य में पहले से ही दुर्लभ वनस्पतियों के संरक्षण के लिए कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिनमें अनामलाई रिजर्व की *Phyllanthus anamalayanus* और *Dipterocarpus bourdillonii* जैसी अन्य गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियां शामिल हैं। इसलिए, *A. mahalingamii* को भी स्थानीय संरक्षण रणनीतियों में शामिल करना अनिवार्य है। राज्य सरकार ने लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण के लिए 50 करोड़ रुपये की लक्षित पूंजी के साथ एक विशेष कोष (फंड) स्थापित किया है। इस कोष का उपयोग कमजोर प्रजातियों की बहाली के लिए लक्षित और प्रभावी कार्यक्रम विकसित करने हेतु किया जा सकता है, ताकि इस नई खोजी गई प्रजाति को विलुप्त होने के कगार से बचाया जा सके।



