ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय (UBC) के एक नए शोध ने रैकूनों की संज्ञानात्मक क्षमताओं पर प्रकाश डाला है, जो यह दर्शाता है कि ये जीव केवल तत्काल भूख से प्रेरित नहीं होते, बल्कि उनमें जटिल समस्या-समाधान कौशल भी मौजूद हैं। यह अध्ययन, जो शहरी अनुकूलनकर्ताओं की बुद्धिमत्ता की गहराई से पड़ताल करता है, रैकूनों की प्रेरणा को एक नए आयाम पर स्थापित करता है, जो उनकी आंतरिक जिज्ञासा को दर्शाता है।
शोधकर्ताओं, जिनमें हन्ना ग्रिबलिंग और डॉ. सारा बेंसन-एम्राम शामिल हैं, ने एक विशेष रूप से निर्मित बहु-पहुँच पहेली बॉक्स का उपयोग किया, जिसमें नौ प्रवेश तंत्र थे, जिन्हें आसान, मध्यम और कठिन स्तरों में वर्गीकृत किया गया था। प्रत्येक 20 मिनट के परीक्षण में, पहेली बॉक्स में केवल एक मार्शमैलो इनाम रखा जाता था। महत्वपूर्ण अवलोकन यह था कि मार्शमैलो खाने के बाद भी, रैकून नए तंत्रों को खोलना जारी रखते थे, जो स्पष्ट रूप से सूचना-खोज का संकेत देता है। इस व्यवहार को 'सूचना भक्षण' (information foraging) नाम दिया गया है, जो यह दर्शाता है कि उनकी प्रेरणा केवल भोजन की तलाश तक सीमित नहीं है, बल्कि ज्ञान प्राप्त करने की आंतरिक इच्छा से प्रेरित है।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि रैकून कार्य की कठिनाई के आधार पर अपनी रणनीति को समायोजित करते हैं, जो लचीले समस्या-समाधान कौशल को दर्शाता है। जब समाधान आसान होते थे, तो रैकून व्यापक रूप से अन्वेषण करते थे और विभिन्न खुले मार्गों को आज़माते थे। इसके विपरीत, जैसे-जैसे कार्य की जटिलता बढ़ती गई, उन्होंने पहले से ज्ञात और भरोसेमंद समाधानों को प्राथमिकता दी, फिर भी सबसे कठिन स्तरों पर भी कई समाधानों का अन्वेषण जारी रखा। ग्रिबलिंग ने इस पैटर्न की तुलना रेस्तरां में ऑर्डर देने से की, जहाँ व्यक्ति जोखिम और प्रयास के आधार पर अपनी जिज्ञासा और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाता है।
यह शोध प्रतिष्ठित पत्रिका 'एनिमल बिहेवियर' में प्रकाशित हुआ है, और यह रैकूनों को केवल अवसरवादी भक्षण करने वाले जीवों के रूप में देखने की पारंपरिक धारणा को चुनौती देता है। यह क्षमता, जो केवल भोजन के लिए नहीं, बल्कि जानकारी के लिए भी समस्याओं को हल करती है, उन्हें वैंकूवर जैसे जटिल शहरी परिदृश्यों में फलने-फूलने में लाभ प्रदान करती है। उनकी सफलता का श्रेय उनके संज्ञानात्मक और शारीरिक लक्षणों को दिया जाता है, विशेष रूप से उनके आगे के पंजे, जो संवेदी तंत्रिकाओं से भरपूर होते हैं और जटिल तंत्रों को कुशलता से संभालने के लिए उपयुक्त हैं।
वैज्ञानिकों का सुझाव है कि इन संज्ञानात्मक लक्षणों को समझना शहरी वन्यजीवों के प्रबंधन रणनीतियों को सूचित करने में सहायक हो सकता है, विशेष रूप से भालू जैसी अन्य प्रजातियों के प्रबंधन के लिए जो मानव-निर्मित संसाधनों तक पहुँचने के लिए समस्या-समाधान का उपयोग करती हैं। वन्यजीवों के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व सुनिश्चित करने के लिए, यह ज्ञान महत्वपूर्ण है कि इन जीवों की प्रेरणा केवल तात्कालिक आवश्यकता से परे है, जिससे नकारात्मक मानव-वन्यजीव संपर्क को कम करने में मदद मिलती है।



