भारतीय सेना के 'मूक योद्धा': गणतंत्र दिवस परेड में जानवरों का ऐतिहासिक प्रदर्शन

द्वारा संपादित: Katerina S.

77वें गणतंत्र दिवस परेड के अवसर पर कर्तव्य पथ पर एक ऐतिहासिक और गौरवशाली दृश्य देखने को मिला। पहली बार, भारतीय सेना की रिमाउंट वेटरनरी कोर (RVC) के एक विशेष दस्ते ने मार्च किया, जिसे 'मूक योद्धा' (Silent Warriors) का नाम दिया गया है। इस प्रदर्शन ने देश के सबसे दुर्गम और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक क्षेत्रों में सैन्य अभियानों को सफल बनाने में जानवरों की अपरिहार्य भूमिका को रेखांकित किया। इस गौरवशाली टुकड़ी का नेतृत्व कैप्टन हर्षिता राघव ने किया, जो इस विशिष्ट दस्ते की कमान संभालने वाली पहली महिला सैन्य अधिकारी बनीं।

इस विशेष दल में सेना के प्रशिक्षित कुत्ते, दो कूबड़ वाले बैक्ट्रियन ऊंट और बेहद मजबूत ज़ांस्करी टट्टू शामिल थे। ये जानवर सियाचिन ग्लेशियर और लद्दाख जैसे अत्यधिक ऊंचाई वाले युद्ध क्षेत्रों में निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। परेड के दौरान 'मेक इन इंडिया' की राष्ट्रीय अवधारणा पर विशेष जोर दिया गया, जिसमें स्वदेशी नस्लों की क्षमताओं को दुनिया के सामने रखा गया। इसमें मुधोल हाउंड, रामपुर हाउंड, चिप्पीपराई, कोम्बाई और राजापलायम जैसी भारतीय नस्ल के कुत्तों ने भाग लिया। ये स्थानीय नस्लें अपनी स्वाभाविक सहनशक्ति और फुर्ती के लिए जानी जाती हैं, जो विस्फोटक खोजने और कठिन परिस्थितियों में खोज एवं बचाव कार्यों के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं।

भारतीय सेना की के9 (K9) इकाई सैन्य बलों का एक अत्यंत विशिष्ट और तकनीकी रूप से सक्षम अंग है। परेड के दौरान, कुछ सैन्य कुत्तों को विशेष सुरक्षात्मक चश्मे (गॉगल्स) पहने हुए देखा गया। ये चश्मे युद्ध क्षेत्रों और धूल भरे इलाकों में उनकी आंखों को मलबे और हानिकारक कणों से बचाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जिससे उनकी कार्यक्षमता और दृष्टि सुरक्षित बनी रहती है।

परेड में लद्दाख के ठंडे रेगिस्तानों में परिचालन के लिए हाल ही में शामिल किए गए बैक्ट्रियन ऊंटों ने सबका ध्यान आकर्षित किया। ये दो कूबड़ वाले ऊंट शून्य से नीचे के अत्यधिक तापमान में 250 किलोग्राम तक का भारी भार उठाने में सक्षम हैं। वर्ष 2016 से डीआरडीओ (DRDO) की प्रयोगशाला डीआईएचएआर (DIHAR) और आरवीसी (RVC) के बीच गहन परीक्षणों के बाद इन्हें आधिकारिक तौर पर सेना के बेड़े में शामिल किया गया है। ये ऊंट पारंपरिक खच्चरों और टट्टुओं की तुलना में अधिक भार वहन क्षमता रखते हैं और 14,000 फीट की ऊंचाई पर 150-200 किलोग्राम वजन ढो सकते हैं, जिससे वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सेना की रसद सहायता प्रणाली काफी मजबूत हुई है।

लद्दाख की उच्च हिमालयी घाटियों की स्थानिक नस्ल 'ज़ांस्करी टट्टू' भी इस परेड का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थे। ये टट्टू साल 2020 से सियाचिन जैसे दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्रों में सेवा दे रहे हैं। इनकी असाधारण सहनशक्ति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ये 15,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर और माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक के जमा देने वाले तापमान में 40-60 किलोग्राम वजन उठा सकते हैं। गश्त के दौरान ये टट्टू प्रतिदिन 70 किलोमीटर तक की दूरी तय करने का सामर्थ्य रखते हैं, जो दुर्गम इलाकों में संचार और आपूर्ति बनाए रखने में सहायक है।

'हिम योद्धा' दस्ते ने प्रशिक्षित शिकारी पक्षियों, विशेष रूप से 'ब्लैक काइट्स' (चील) का प्रदर्शन किया, जो आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को दर्शाते हैं। इन पक्षियों को उच्च तकनीक वाले कैमरों से लैस किया गया है, जो हवाई टोही (एरियल रिकोनिसेंस) करने और अग्रिम चौकियों के पीछे दुश्मन के छोटे ड्रोनों का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम हैं। यह पहल प्रकृति की शक्ति और रक्षा विज्ञान के अनूठे सामंजस्य का प्रतीक है।

इन जानवरों के साथ 'हिम योद्धा' के सैनिक भी कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे, जो जीपीएस (GPS) नेविगेटर और उन्नत रेडियो सेट जैसे आधुनिक संचार उपकरणों से लैस थे। यह तालमेल स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है कि कैसे भारतीय सेना अपनी पारंपरिक शक्ति और प्राकृतिक संसाधनों को आधुनिक तकनीक के साथ एकीकृत कर रही है ताकि सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

गणतंत्र दिवस के इस भव्य आयोजन में इन जानवरों को शामिल करना भारतीय सेना के उस व्यापक और समावेशी दृष्टिकोण को प्रदर्शित करता है, जहां प्राकृतिक क्षमताओं को आधुनिक युद्ध कौशल के साथ जोड़ा जाता है। यह न केवल हमारी सैन्य विविधता को दर्शाता है, बल्कि उन 'मूक योद्धाओं' के प्रति राष्ट्र का सम्मान भी प्रकट करता है जो बिना किसी शिकायत के देश की सीमाओं की अखंडता बनाए रखने में अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं।

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स्रोतों

  • english

  • newKerala.com

  • Asianet News Network Pvt Ltd

  • The Indian Express

  • Daily Pioneer

  • India Sentinels

  • NewKerala.com

  • PGurus

  • The Hindu

  • Business Today

  • Hindustan Times

  • The Economic Times

  • NationalDefence.in

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