शोधकर्ताओं ने लैब में सफलतापूर्वक विकसित किए पूर्ण कार्यात्मक बाल कूप; 2026 तक गंजेपन के उपचार में मिलेगी असीमित सफलता
द्वारा संपादित: Светлана Вельгуш
संयुक्त राज्य अमेरिका और जापान के शोध दलों ने ऊतक बायोइंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक युगांतरकारी सफलता प्राप्त की है। उन्होंने प्रयोगशाला के भीतर पूरी तरह से कार्यात्मक बाल कूप (hair follicles) विकसित करने में कामयाबी हासिल की है, जो प्राकृतिक रूप से अपना विकास चक्र बनाए रखने में सक्षम हैं। वर्ष 2026 तक की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि ने प्रत्यारोपण के लिए आवश्यक सामग्री की असीमित उपलब्धता की संभावना जगा दी है, जो एलोपेसिया जैसी गंभीर समस्याओं के लिए एक स्थायी समाधान बन सकती है।
इस वैज्ञानिक सफलता का सबसे बड़ा रहस्य उस जटिल कोशिकीय वास्तुकला का सटीक अनुकरण करना है, जो पहले के शोधों में संभव नहीं हो पाया था। इस शोध का मुख्य केंद्र बिंदु तीसरे और सबसे महत्वपूर्ण कोशिका प्रकार—सहायक मेसेनकाइमल कोशिकाओं (auxiliary mesenchymal cells)—का एकीकरण है। ये कोशिकाएं एक मजबूत संरचनात्मक ढांचे के रूप में कार्य करती हैं। पिछले शोधों में केवल उपकला स्टेम कोशिकाओं और डर्मल पैपिला कोशिकाओं का उपयोग किया गया था, जिससे केवल प्रारंभिक संरचनाएं ही बन पाती थीं, जो पूर्ण विकास चक्र को पूरा करने या शरीर में एकीकृत होने में विफल रहती थीं।
इन सहायक मेसेनकाइमल कोशिकाओं के जुड़ाव से डर्मल शीथ का निर्माण हुआ और कूप के 'बल्ज़' (bulge) क्षेत्र को सक्रिय करने में मदद मिली। इसके परिणामस्वरूप बालों के विकास की चारों अवस्थाओं को सफलतापूर्वक प्रेरित किया गया: एनाजेन (विकास), कैटाजेन (संक्रमण), टेलोजेन (सुप्तावस्था), और एक्सोजेन (बालों का गिरना)। चूहों के मॉडल पर किए गए इस अध्ययन ने यह साबित कर दिया है कि शरीर के बाहर भी एक पूर्ण अंग जैसी संरचना का निर्माण किया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने इन विट्रो (in vitro) पूर्ण कार्यक्षमता प्राप्त करने के लिए तीन आवश्यक कोशिकीय घटकों का एक सटीक 'फॉर्मूला' निर्धारित किया है।
जापानी स्टार्टअप 'ऑर्गनटेक' (OrganTech) इस तकनीक को विकसित करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और बताया जा रहा है कि वे इन विट्रो कूपों के बड़े पैमाने पर उत्पादन की दिशा में काम कर रहे हैं। इस प्रक्रिया के अगले चरणों में तकनीक का विस्तार करना और नैदानिक उपयोग से पहले मानव सुरक्षा के कड़े मानकों को पूरा करना शामिल है। प्रयोगशाला में विकसित ये कूप न केवल गंजेपन के उपचार में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे, बल्कि नई दवाओं के परीक्षण के लिए एक ऐसा मंच भी तैयार करेंगे जहां जानवरों या इंसानों पर सीधे प्रयोग करने की आवश्यकता नहीं होगी।
पुनर्योजी चिकित्सा (regenerative medicine) के क्षेत्र में इस उपलब्धि के दूरगामी परिणाम होंगे। यह स्पष्ट करता है कि जटिल अंगों की बायोइंजीनियरिंग के लिए केवल प्राथमिक कोशिकाओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सहायक कोशिका समूहों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इन कम चर्चित लेकिन जीवन रक्षक कोशिकाओं के महत्व को समझना भविष्य में अन्य जटिल अंगों के निर्माण के लिए एक आदर्श मॉडल प्रदान कर सकता है, जिन्हें अब तक प्रयोगशाला में विकसित करना नामुमकिन समझा जाता था।
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स्रोतों
Onedio
Sabah
Hürriyet
Vertex AI Search
Onedio
The Japan Times
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