मोनाश और मेलबर्न विश्वविद्यालयों ने 6G के लिए विकसित की 'क्वांटम-जैसी' ऑप्टिकल वायरलेस संचार तकनीक
द्वारा संपादित: Svetlana Velgush
मोनाश विश्वविद्यालय और मेलबर्न विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की टीमों ने मिलकर ऑप्टिकल वायरलेस संचार के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी दृष्टिकोण पेश किया है। यह नवाचार विशेष रूप से छठी पीढ़ी (6G) के नेटवर्क के युग में आने वाली गंभीर चुनौतियों का समाधान करने के लिए तैयार किया गया है। इस विकास की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें ऑप्टिकल प्रणालियों के भीतर क्वांटम भौतिकी के सिद्धांतों को एकीकृत किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य डेटा केंद्रों जैसे घने आंतरिक वातावरण में उच्च गति, अटूट विश्वसनीयता और बेहतर ऊर्जा दक्षता सुनिश्चित करना है।
मेलबर्न विश्वविद्यालय के प्रोफेसर तास निर्मलातास, जो वायरलेस ऑप्टिकल संचार के क्षेत्र में एक अग्रणी नाम हैं, ने इस नई वास्तुकला के महत्व पर प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया कि इस तकनीक का लक्ष्य वायरलेस नेटवर्क में फाइबर-ऑप्टिक के समान बैंडविड्थ प्रदान करना है। यह नवाचार पारंपरिक रेडियो फ्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम (3 kHz से 300 GHz) के उपयोग से हटकर ऑप्टिकल वायरलेस संकेतों की ओर एक बड़ा कदम है। इन संकेतों को क्वांटम मैकेनिक्स से प्रेरित सुसंगतता (coherence) तकनीकों का उपयोग करके आकार दिया जाता है और निर्देशित किया जाता है।
इस प्रणाली का एक महत्वपूर्ण घटक इसका मॉड्यूलर दृष्टिकोण है, जो क्वांटम डिजाइन सिद्धांतों पर आधारित ऑप्टिकल फेज़्ड एरेज़ का उपयोग करता है। यह विशिष्ट संरचना कई छोटे ऑप्टिकल उत्सर्जकों को एक एकल, अत्यधिक केंद्रित स्रोत के रूप में कार्य करने की अनुमति देती है। यह प्रक्रिया क्वांटम उपकरणों में देखी जाने वाली 'सुपर-रेडिएंस' (super-radiance) की घटना के समान है। यह तंत्र एक शक्तिशाली और दिशात्मक सिग्नल ट्रांसमिशन सुनिश्चित करता है, जो जटिल विन्यास में हस्तक्षेप को कम करने और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए अनिवार्य है।
मोनाश विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग-इलेक्ट्रिकल विभाग के प्रोफेसर मालिन प्रेमरात्ने ने पारंपरिक वायरलेस विधियों की सीमाओं का उल्लेख किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब उपकरणों का घनत्व अधिक होता है, तो मौजूदा तकनीकें मौलिक बाधाओं का सामना करती हैं। इसमें हस्तक्षेप का बढ़ना, विश्वसनीयता में कमी और अत्यधिक बिजली की खपत जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा, गर्मी का बढ़ना प्रदर्शन को सीमित कर देता है। ऐसे सिस्टम को स्केल करने के लिए अक्सर जटिल केबलिंग बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है, जिससे लचीलापन कम हो जाता है।
IEEE कम्युनिकेशंस लेटर्स (IEEE Communications Letters) में प्रकाशित यह शोध एक ऐसा समाधान प्रस्तुत करता है जो बुनियादी ढांचे के पूर्ण पुनर्गठन के बिना नेटवर्क को स्केल करने की अनुमति देता है। इसका मॉड्यूलर डिजाइन न केवल लचीलापन प्रदान करता है, बल्कि ऊर्जा को सटीक रूप से केंद्रित करने की क्षमता भी देता है। यह तकनीक सामान्य उपभोक्ता उपकरणों से आगे बढ़कर कंप्यूटरों और डेटा केंद्रों के भीतर उच्च गति वाले कनेक्शनों की समस्याओं को हल करने के लिए डिज़ाइन की गई है, जहाँ स्थान, गर्मी और केबलों की सीमाएं सबसे अधिक कठोर होती हैं।
ऑप्टिकल प्रणालियों में क्वांटम भौतिकी के सिद्धांतों का एकीकरण वायरलेस संचार के क्षेत्र में एक युगांतरकारी बदलाव या 'पैराडाइम शिफ्ट' का संकेत देता है। सुपर-रेडिएंस की वैज्ञानिक अवधारणा, जिसमें N उत्सर्जकों को इस तरह सिंक्रोनाइज़ किया जाता है कि वे N के वर्ग (N²) के अनुपात में तीव्रता के साथ एक शक्तिशाली पल्स उत्पन्न करते हैं, असाधारण सुसंगतता और ऊर्जा दक्षता की गारंटी देती है। 6G तकनीक के भविष्य में, जहाँ एज कंप्यूटिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वितरित इंटेलिजेंस जैसी प्रौद्योगिकियाँ केंद्र में होंगी, भौतिक स्तर पर होने वाले ये सुधार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये नवाचार न केवल अल्ट्रा-हाई डेटा ट्रांसफर गति प्रदान करेंगे, बल्कि सब-मिलीसेकंड विलंबता (latency) के कठिन लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी सहायक होंगे।
अंततः, मोनाश और मेलबर्न विश्वविद्यालयों का यह संयुक्त प्रयास आंतरिक वायरलेस नेटवर्क की क्षमताओं को फाइबर-ऑप्टिक के प्रदर्शन स्तर तक ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह शोध न केवल वर्तमान तकनीकी सीमाओं को चुनौती देता है, बल्कि भविष्य के स्मार्ट शहरों और उन्नत औद्योगिक प्रणालियों के लिए एक ठोस आधार भी तैयार करता है। जैसे-जैसे डेटा की मांग बढ़ रही है, इस तरह के क्वांटम-प्रेरित समाधान यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारा डिजिटल बुनियादी ढांचा न केवल तेज हो, बल्कि टिकाऊ और ऊर्जा-कुशल भी बना रहे। यह तकनीक आने वाले समय में वैश्विक संचार मानकों को पुनर्परिभाषित करने की क्षमता रखती है।
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स्रोतों
Geo.fr
Chief IT
Frontiers of Science and Technology
News Hub
Australian Academy of Technological Sciences & Engineering
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