ट्रम्प ने फार्मास्यूटिकल्स, ट्रकों और फर्नीचर पर नए टैरिफ की घोषणा की
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वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 1 अक्टूबर, 2025 से प्रभावी विभिन्न वस्तुओं पर नए टैरिफ की घोषणा की है। इन उपायों का उद्देश्य अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करना और घरेलू उद्योगों की रक्षा करना है। नई टैरिफ व्यवस्था के तहत, ब्रांडेड या पेटेंट वाली फार्मास्युटिकल दवाओं पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा, जब तक कि दवा कंपनी अमेरिका में अपना विनिर्माण संयंत्र स्थापित नहीं करती है। यह उन कंपनियों पर लागू नहीं होगा जिन्होंने पहले ही निर्माण शुरू कर दिया है या जो निर्माण के अधीन हैं। 2024 में, अमेरिका ने लगभग 233 बिलियन डॉलर के फार्मास्युटिकल और औषधीय उत्पादों का आयात किया था। इस टैरिफ से दवाओं की कीमतों में वृद्धि हो सकती है, जिससे स्वास्थ्य देखभाल की लागत और मेडिकेयर और मेडिकेड पर असर पड़ सकता है। कुछ दवा कंपनियों ने पहले ही अमेरिका में विनिर्माण में निवेश करने या बढ़ाने की योजना की घोषणा की है।
इसके अतिरिक्त, अमेरिका के बाहर निर्मित सभी भारी ट्रकों पर 25% का अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि यह कदम अमेरिकी ट्रक निर्माताओं को अनुचित विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए है। मेक्सिको अमेरिका को मध्यम और भारी-भरकम ट्रकों का सबसे बड़ा निर्यातक है, और इन वाहनों का आयात 2019 से तीन गुना हो गया है। इस टैरिफ से परिवहन लागत पर दबाव पड़ सकता है। फर्नीचर उद्योग को भी प्रभावित किया जाएगा, जिसमें रसोई अलमारियाँ, बाथरूम वैनिटी और संबंधित उत्पादों पर 50% टैरिफ और असबाबवाला फर्नीचर पर 30% टैरिफ लगाया जाएगा। राष्ट्रपति ने कहा कि इन उत्पादों का बड़े पैमाने पर अमेरिका में आयात किया जा रहा है, जो घरेलू निर्माताओं को नुकसान पहुंचा रहा है। इन टैरिफों से घर बनाने वालों और नवीनीकरण करने वालों के लिए लागत बढ़ सकती है।
यह घोषणा राष्ट्रपति ट्रम्प की संरक्षणवादी व्यापार नीतियों की निरंतरता को दर्शाती है। मार्च 2025 में, अमेरिका ने मेक्सिको से उत्पादों पर 25% टैरिफ और फरवरी 2025 में कनाडा, मेक्सिको और चीन से उत्पादों पर 25% टैरिफ लगाया था। इन टैरिफों का उद्देश्य अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करना और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है। हालांकि, इन उपायों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि टैरिफ से मुद्रास्फीति बढ़ सकती है और आर्थिक विकास धीमा हो सकता है। उदाहरण के लिए, फार्मास्युटिकल टैरिफ से मरीजों के लिए दवाओं की लागत बढ़ सकती है, और ट्रक टैरिफ से परिवहन लागत बढ़ सकती है। इन टैरिफों के दीर्घकालिक प्रभाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर उनके प्रभाव का मूल्यांकन जारी रहेगा।
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स्रोतों
Deutsche Welle
DW
Infobae
BBC News Mundo
Euronews
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