7 दिसंबर 2025 की रविवार की सुबह, पश्चिम अफ्रीकी राष्ट्र बेनिन गणराज्य में एक बड़ा राजनीतिक उथल-पुथल मचाने का प्रयास किया गया। यह प्रयास एक सैन्य विद्रोह के रूप में सामने आया, जिसे सरकार के प्रति वफादार इकाइयों ने तुरंत और प्रभावी ढंग से दबा दिया। इस घटना ने देश की हालिया राजनीतिक स्थिरता पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया।
इस विद्रोह को अंजाम देने वाले सैन्य कर्मियों के एक समूह ने स्वयं को 'सैन्य समिति फॉर रिफंडेशन (पुनरुद्धार)' (वीकेआर) नाम दिया। उन्होंने सरकारी टेलीविजन और रेडियो प्रसारण निगम भवन पर कब्जा कर लिया। इस केंद्र से उन्होंने देश की सरकार को भंग करने, संविधान को निलंबित करने और मौजूदा राष्ट्रपति पैट्रिस टालोन को उनके पद से हटाने की घोषणा की। विद्रोहियों ने लेफ्टिनेंट कर्नल पास्कल टिगरी को इस समिति का नेता घोषित किया।
संघर्ष की शुरुआत देश के आर्थिक केंद्र, कोटनो में राष्ट्रपति निवास, कैम्प गेज़ो के आसपास गोलीबारी की आवाज़ों से हुई, जो शुरुआती झड़पों का संकेत दे रही थी। आंतरिक मामलों के मंत्री अलास्साने सेदू ने तुरंत पुष्टि की कि विद्रोह को सफलतापूर्वक विफल कर दिया गया है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि बेनिन के सशस्त्र बलों और उनके उच्च कमान का एक बड़ा हिस्सा अपनी शपथ के प्रति निष्ठावान बना रहा। विदेश मामलों और सहयोग मंत्री ओलुसेगुन अजादी बकारी ने बाद में स्पष्ट किया कि तख्तापलट करने वालों का नियंत्रण केवल टेलीविजन स्टेशन तक ही सीमित रह पाया था, और सेना की कुछ इकाइयों तथा राष्ट्रपति गार्ड ने शीघ्र ही व्यवस्था बहाल कर दी।
इस कार्रवाई के परिणामस्वरूप, कम से कम चौदह सैन्य कर्मियों को हिरासत में लिया गया। हालांकि, विद्रोह का सरगना, लेफ्टिनेंट कर्नल पास्कल टिगरी, इस दौरान भागने में सफल रहा। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने इस गैर-संवैधानिक कार्रवाई की कड़ी निंदा की। पश्चिमी अफ्रीकी राज्यों के आर्थिक समुदाय (इकोवास) और अफ्रीकी संघ (एयू) जैसे प्रमुख क्षेत्रीय और महाद्वीपीय निकायों ने तुरंत इस कृत्य की भर्त्सना की।
यह विफल तख्तापलट क्षेत्रीय स्तर पर बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता के बीच हुआ, और यह अप्रैल 2026 में होने वाले आगामी राष्ट्रपति चुनावों की पृष्ठभूमि में घटित हुआ। राष्ट्रपति टालोन 2016 से सत्ता में हैं और 2021 में उन्हें फिर से चुना गया था, जबकि वह तीसरे कार्यकाल के लिए पात्र नहीं थे। इस घटना से ठीक पहले, जनवरी 2025 में, टालोन के दो सहयोगियों को 2024 में उनके खिलाफ साजिश रचने के आरोपों में दोषी ठहराया गया था। इसके अतिरिक्त, विद्रोह से कुछ समय पहले, संसद ने राष्ट्रपति के कार्यकाल को पाँच साल से बढ़ाकर सात साल करने के लिए एक संशोधन पारित किया था, हालांकि दो-कार्यकाल की सीमा को बरकरार रखा गया था। चुनावी माहौल में, सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवार, वित्त मंत्री रोमुआल्ड वाडानी, को पसंदीदा माना जा रहा था, जबकि मुख्य विपक्षी उम्मीदवार रेनॉड एगबोजो को चुनाव आयोग (सीईएनए) द्वारा अयोग्य घोषित कर दिया गया था।
विद्रोहियों ने अपने कार्यों को बेनिन के उत्तरी हिस्सों में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और सामाजिक शिकायतों से प्रेरित बताया। यह घटना पश्चिम अफ्रीका में सत्ता हथियाने की हालिया घटनाओं की श्रृंखला में नवीनतम थी, जिसमें पड़ोसी गिनी-बिसाऊ में नवंबर 2025 में सफल तख्तापलट भी शामिल था। फ्रांस से 1960 में स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद, बेनिन ने 1991 से पहले कई सैन्य तख्तापलट देखे थे, जिसके बाद देश ने अपेक्षाकृत राजनीतिक स्थिरता का प्रदर्शन किया था। इसलिए, यह ताजा घटना इसके लोकतांत्रिक संस्थानों के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा बनकर सामने आई है।



