ईरान ने अमेरिका के शांति प्रस्ताव को ठुकराया: क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक तेल संकट गहराया

द्वारा संपादित: Tatyana Hurynovich

26 मार्च, 2026 की तारीख मध्य पूर्व के इतिहास में एक और महत्वपूर्ण मोड़ लेकर आई जब ईरान ने आधिकारिक रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा पेश किए गए 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए पहुंचाए गए इस शांति प्रस्ताव को तेहरान के नेतृत्व ने "अत्यधिक मांग वाला और युद्ध के मैदान में अमेरिका की हार की सच्चाई से कोसों दूर" बताया है। यह कूटनीतिक गतिरोध न केवल क्षेत्रीय संघर्ष को गहराता है, बल्कि इसके वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर भी विनाशकारी प्रभाव पड़ने की आशंका है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है, वर्तमान में भारी तनाव का केंद्र बना हुआ है।

अमेरिकी प्रशासन द्वारा तैयार की गई इस विस्तृत योजना में कई लुभावने वादे और सख्त शर्तें शामिल थीं। इसमें ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने, नागरिक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग प्रदान करने और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की सख्त निगरानी में परमाणु गतिविधियों को सीमित करने का प्रस्ताव था। इसके साथ ही, वाशिंगटन ने मिसाइल परीक्षणों पर रोक और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की गारंटी मांगी थी। हालांकि, ईरानी नेतृत्व ने इसे एक कूटनीतिक जाल करार दिया है। वे फरवरी 2026 और पिछले साल जून में हुए संवाद के पिछले अनुभवों का हवाला देते हुए इसे अमेरिका की एक और चाल मान रहे हैं।

शांति प्रस्ताव को ठुकराने के साथ ही ईरान ने अपनी शर्तों की एक सूची पेश की है, जो अमेरिका के लिए स्वीकार करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। तेहरान ने मांग की है कि अमेरिका और इज़राइल अपनी "आक्रामक नीतियों और लक्षित हत्याओं" को तुरंत बंद करें। ईरान ने भविष्य के संघर्षों को रोकने के लिए एक ठोस अंतरराष्ट्रीय तंत्र की स्थापना, युद्ध के कारण हुए नुकसान के लिए वित्तीय क्षतिपूर्ति और सबसे महत्वपूर्ण रूप से, होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की पूर्ण संप्रभुता को मान्यता देने की शर्त रखी है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल वाशिंगटन के साथ किसी भी स्तर पर कोई बातचीत नहीं हो रही है।

युद्ध के मैदान में भी तनाव अपने चरम पर है। अमेरिकी धमकियों के जवाब में ईरानी सेना ने न केवल तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचाने की चेतावनी दी है, बल्कि रणनीतिक हमले भी किए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इज़राइली बुनियादी ढांचे और अमेरिकी विमानवाहक पोत 'यूएसएस अब्राहम लिंकन' (USS Abraham Lincoln) को निशाना बनाकर मिसाइलें दागी गई हैं। इन सैन्य कार्रवाइयों ने इस आशंका को सच साबित कर दिया है कि यह संघर्ष केवल कूटनीतिक बयानों तक सीमित नहीं रहने वाला है, बल्कि एक पूर्ण सैन्य टकराव का रूप ले सकता है।

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कड़ा रुख अपनाते हुए अतिरिक्त पैराट्रूपर्स की तैनाती के आदेश दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से तेल का प्रवाह बाधित हुआ, तो अमेरिका ईरान के प्रमुख बिजली संयंत्रों को निशाना बनाने से नहीं हिचकिचाएगा। हालांकि, तनाव को कम करने के एक अंतिम प्रयास के रूप में उन्होंने पांच दिनों की मोहलत की पेशकश भी की है। वैश्विक बाजारों में इस अनिश्चितता का असर साफ देखा जा सकता है। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है, और दुनिया भर के निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि यह महत्वपूर्ण जलमार्ग बंद होता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी मंदी का सामना करना पड़ सकता है।

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स्रोतों

  • Clarin

  • Daily Mail Online

  • Diario Público

  • Pagina 12

  • Infobae

  • Wikipedia

  • la diaria

  • TPR - Texas Public Radio

  • WSLS

  • The Guardian

  • NYC.gov

  • Wikipedia

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