CMS 03 satellite has been injected into their intended orbit. Mission successfully accomplished. 🎉 #ISRO
CMS 03 उपग्रह अपनी निर्धारित कक्षा में डाल दिया गया है.
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द्वारा संपादित: Tetiana Martynovska
CMS 03 satellite has been injected into their intended orbit. Mission successfully accomplished. 🎉 #ISRO
CMS 03 उपग्रह अपनी निर्धारित कक्षा में डाल दिया गया है.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 2 नवंबर, 2025 को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए देश के अब तक के सबसे भारी संचार उपग्रह, सीएमएस-03, को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित किया। यह ऐतिहासिक प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से संपन्न हुआ, जो भारत की बढ़ती तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रमाण है।
🚨 ISRO successfully launches India's heaviest satellite, CMS-03. 🇮🇳🚀
ISRO ने भारत के सबसे भारी उपग्रह CMS-03 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया
लगभग 4,410 किलोग्राम प्रक्षेपण भार वाला यह उपग्रह, जिसे जीएसएटी-7आर के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय भूभाग के साथ-साथ विशाल समुद्री क्षेत्र में बहु-बैंड संचार सेवाओं को सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके पेलोड में सी, विस्तारित सी, और कू संचार बैंड का उपयोग करने वाले ट्रांसपोंडर शामिल हैं, जो आवाज, डेटा और वीडियो लिंक की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे। यह उन्नत मंच विशेष रूप से भारतीय नौसेना के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सुरक्षित, बहु-बैंड संचार को बढ़ावा देगा, जिससे नौसेना के समुद्री अभियानों को मजबूती मिलेगी।
इस महत्वपूर्ण मिशन के लिए इसरो के शक्तिशाली प्रक्षेपण यान एलवीएम3-एम5 का उपयोग किया गया, जिसे इसकी भारी भार वहन क्षमता के कारण 'बाहुबली' उपनाम दिया गया है। इस शक्तिशाली रॉकेट ने सीएमएस-03 को सफलतापूर्वक जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) में स्थापित किया। यह प्रक्षेपण एलवीएम3 श्रृंखला की पांचवीं परिचालन उड़ान थी, जो इस वाहन की विश्वसनीयता को और पुष्ट करती है। उल्लेखनीय है कि एलवीएम3 ने जुलाई 2023 में चंद्रयान-3 मिशन को सफलतापूर्वक तैनात किया था, जिसने भारत को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला पहला देश बनाया था।
सीएमएस-03 का आगमन देश के डिजिटल संपर्क और पहुंच को अभूतपूर्व रूप से बढ़ाएगा, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में नागरिक सेवाओं और महत्वपूर्ण रणनीतिक अनुप्रयोगों को सशक्त करेगा। यह उपग्रह जीएसएटी-7 'रुक्मिणी' की जगह ले रहा है और उच्च क्षमता वाले बैंडविड्थ की पेशकश करेगा, जिससे जहाजों, पनडुब्बियों और विमानों के बीच वास्तविक समय का सुरक्षित संचार संभव होगा। इसरो के वैज्ञानिकों ने इस सफलता को देश की प्रगति के एक नए अध्याय के रूप में देखा है, जो स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के माध्यम से जटिल चुनौतियों का समाधान करने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
Space.com
LVM3-M5/CMS-03 MISSION
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Isro moves LVM3 to launch pad for November 2 liftoff with CMS-03 satellite - India Today
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🚨 BREAKING - NASA ANNOUNCES NUCLEAR MARS MISSION IN 2028 NASA has revealed plans to launch the first nuclear-powered interplanetary spacecraft to Mars before the end of 2028; a major leap in deep space capability. The mission, Space Reactor-1 (SR-1) Freedom, will: ⚡
During today's EVA, the crew will install a mod kit for the first of a pair of IROSA (Roll Out Solar Arrays), which will arrive later this year. Today's EVA will prepare the 2A power channel, with EVA 95 preparing the 3B channel.