पोषण विशेषज्ञ ट्राउट को सामन के स्वस्थ विकल्प के रूप में उजागर कर रहे हैं
द्वारा संपादित: Olga Samsonova
पोषण विशेषज्ञ इस बात पर प्रकाश डाल रहे हैं कि ट्राउट मछली, जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है, सामन के लिए एक उत्कृष्ट और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प प्रस्तुत करती है। यह समुद्री जीव, जो सैल्मोनिडे परिवार का सदस्य है और सामन तथा चार से निकटता से संबंधित है, आहार संबंधी सिफारिशों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, खासकर जब बात टिकाऊ और स्वस्थ मछली के सेवन की आती है। ट्राउट की विभिन्न प्रजातियों में, रेनबो ट्राउट किराने की दुकानों में सबसे अधिक उपलब्ध है।
पोषण के दृष्टिकोण से, ट्राउट प्रोटीन का एक शानदार स्रोत है, जो शरीर के विकास और क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत के लिए आवश्यक है। बेक किए हुए ट्राउट में लगभग 26.6 ग्राम प्रोटीन प्रति 100 ग्राम पाया जाता है, जो मांसपेशियों के निर्माण और रखरखाव के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त, ट्राउट में आवश्यक अमीनो एसिड, जैसे ल्यूसीन, की उच्च मात्रा होती है, जो मांसपेशियों के विकास में सहायता करता है। तुलनात्मक रूप से, 100 ग्राम फार्म-पालित अटलांटिक सामन में 20.4 ग्राम प्रोटीन होता है, जबकि समान मात्रा में फार्म-पालित रेनबो ट्राउट में 19.9 ग्राम प्रोटीन होता है, जिससे पता चलता है कि दोनों के प्रोटीन स्तर में कोई खास अंतर नहीं है।
ओमेगा-3 फैटी एसिड के मामले में, ट्राउट के लाभ उल्लेखनीय हैं, विशेष रूप से स्मोक्ड रूप में, जिसमें लगभग 2.44 ग्राम ओमेगा-3 फैटी एसिड प्रति 100 ग्राम पाया जाता है। ये ओमेगा-3 फैटी एसिड, जिनमें डीएचए और ईपीए शामिल हैं, मस्तिष्क के कार्य, स्मृति और व्यवहार में सहायता करते हैं, साथ ही शरीर में सूजन को कम करने में भी मदद करते हैं। हालांकि, 100 ग्राम सामन में संयुक्त डीएचए और ईपीए की मात्रा 1.96 ग्राम होती है, जबकि ट्राउट में यह 0.73 ग्राम होती है। ट्राउट में पारा का स्तर भी कम होता है, जो इसे उन उपभोक्ताओं के लिए एक सुरक्षित विकल्प बनाता है जो मछली में पारा की मात्रा को लेकर चिंतित रहते हैं।
शोध से पता चलता है कि ट्राउट विटामिन बी12 और नियासिन से भी भरपूर होता है; नियासिन ऊर्जा उत्पादन और हृदय स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है, क्योंकि शरीर इसे स्वयं उत्पन्न नहीं कर सकता है। कुछ स्रोतों के अनुसार, ट्राउट में कैलोरी भी कम होती है, जो वजन प्रबंधन चाहने वालों के लिए इसे एक उत्कृष्ट आहार विकल्प बनाती है। उपभोक्ता अक्सर ट्राउट को एक हल्का विकल्प मानते हैं, और इसका सौम्य स्वाद उन लोगों के लिए आकर्षक है जो मछली का सेवन शुरू कर रहे हैं। यह बहुमुखी मछली नींबू और जड़ी-बूटियों के साथ आसानी से तैयार की जा सकती है, या इसे सब्जी क्विचे जैसे व्यंजनों में शामिल किया जा सकता है।
हिमाचल प्रदेश जैसे ठंडे जलवायु वाले क्षेत्रों में ट्राउट मछली पालन एक महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि बन गया है, जिसने 1986 में भारत और नॉर्वे सरकार के समझौते के बाद गति पकड़ी थी। यह खेती किसानों की आय में वृद्धि कर रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है, जिससे हिमाचल प्रदेश इस क्षेत्र में देश का पहला राज्य बन गया है। वाणिज्यिक उत्पादन के लिए, ट्राउट पालन के लिए पानी का तापमान 10 से 15 डिग्री सेल्सियस के बीच होना चाहिए, और इसके लिए साफ, बहते हुए पानी की आवश्यकता होती है। बाजार में, ट्राउट की मांग घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है, जिसका निर्यात दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे बड़े शहरों में किया जाता है, और इसकी कीमत लगभग 600 से 700 रुपये प्रति किलोग्राम तक हो सकती है। इसके अलावा, ट्राउट मछली पालन ने राज्य में एंगलिंग पर्यटन को भी बढ़ावा दिया है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त प्रोत्साहन मिला है।
रेनबो ट्राउट, जो उत्तरी अमेरिका में सबसे अधिक बिकने वाली ट्राउट प्रजाति है, का मांस हल्का और नाजुक होता है, और इसका स्वाद आमतौर पर बहुत अधिक 'मछली जैसा' नहीं होता है। इसकी तैयारी में सरलता एक और बड़ा आकर्षण है; उदाहरण के लिए, ओवन में पकाने पर यह लगभग 20 मिनट में तैयार हो जाता है, खासकर जब इसे नींबू और ताज़ी जड़ी-बूटियों के साथ पन्नी या चर्मपत्र कागज के पैकेट में पकाया जाता है। इस प्रकार, ट्राउट पोषण, स्वाद और पाक बहुमुखी प्रतिभा का एक शक्तिशाली संयोजन प्रस्तुत करता है, जो इसे आधुनिक आहार में एक प्रमुख स्थान दिलाता है।
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स्रोतों
Topsante.com
Top Santé
The Kitchn
Anses
Marmiton
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