क्वांटम उलझाव में जटिल टोपोलॉजी का खुलासा: 48 आयाम और 17,000 से अधिक पैटर्न

द्वारा संपादित: Irena I

दक्षिण अफ्रीका के विटवाटर्सरैंड विश्वविद्यालय (Wits) और चीन के हूझोउ विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के एक संयुक्त दल ने क्वांटम उलझाव के मानक स्वरूप के भीतर एक अप्रत्याशित रूप से समृद्ध आंतरिक संरचना का पता लगाया है। नेचर कम्युनिकेशंस नामक प्रतिष्ठित पत्रिका में प्रकाशित यह खोज क्वांटम प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए मौलिक महत्व रखती है। यह दर्शाता है कि उलझाव उत्पन्न करने के सामान्य तरीके भी एक जटिल बहुआयामी परिदृश्य को छिपाए रखते हैं, जो एक महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि है।

इस गहन अध्ययन का केंद्र बिंदु प्रकाश था, जिसे सहज पैरामीट्रिक डाउन-कन्वर्जन (SPDC) नामक प्रक्रिया के माध्यम से उलझाया गया था। शोधकर्ताओं ने प्रकाश के एक विशिष्ट गुण, जिसे कक्षीय कोणीय संवेग (OAM) कहा जाता है, का विश्लेषण किया। मात्रात्मक परिणामों की गहराई चौंकाने वाली थी: उन्होंने 48 आयामों में फैला हुआ उलझाव पाया और 17,000 से अधिक विशिष्ट टोपोलॉजिकल पैटर्न दर्ज किए। यह संख्या किसी भी भौतिक प्रणाली में अब तक दर्ज किए गए टोपोलॉजिकल पैटर्नों की उच्चतम संख्या है, जो इस घटना की अभूतपूर्व जटिलता को रेखांकित करती है।

वैज्ञानिकों ने निर्णायक रूप से यह स्थापित किया कि केवल कक्षीय कोणीय संवेग (OAM) ही इस जटिल टोपोलॉजी के उत्पन्न होने के लिए पर्याप्त है। इस निष्कर्ष ने उन पूर्व धारणाओं को चुनौती दी जिनके अनुसार इस तरह की जटिलता के लिए OAM और ध्रुवीकरण जैसे प्रकाश के कई गुणों के संयोजन की आवश्यकता होती थी। Wits स्कूल ऑफ फिजिक्स के प्रमुख योगदानकर्ताओं में से एक, प्रोफेसर एंड्रयू फोर्ब्स ने इस बात पर प्रकाश डाला कि टोपोलॉजी सूचना को कूटबद्ध (encode) करने के लिए एक शक्तिशाली साधन के रूप में कार्य करती है। इसका कारण यह है कि यह आंतरिक रूप से शोर (noise) के प्रति अपरिवर्तनीय (invariant) हो सकती है, जो इसे क्वांटम संचार के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।

इस महत्वपूर्ण खोज के तत्काल प्रभाव क्वांटम संचार और गणना के लिए अधिक विश्वसनीय प्रणालियों के निर्माण पर पड़ेंगे। हूझोउ विश्वविद्यालय के प्रमुख लेखक, प्रोफेसर रॉबर्ट डी मेलो कोह ने इस बात पर जोर दिया कि यह जटिल टोपोलॉजी स्थानिक उलझाव से 'मुफ्त में' उत्पन्न होती है। इसका सीधा अर्थ यह है कि उच्च-आयामी कूटलेखन का उपयोग करने की प्रारंभिक बाधा कम हो जाती है, जिससे यह तकनीक अधिक सुलभ हो जाती है।

अपनी सैद्धांतिक भविष्यवाणियों को सिद्ध करने के लिए, शोध दल ने क्वांटम क्षेत्र सिद्धांत (Quantum Field Theory) की अमूर्त अवधारणाओं का सहारा लिया। इन अवधारणाओं का उपयोग यह निर्धारित करने के लिए किया गया कि टोपोलॉजी की खोज कहाँ करनी है और किन विशिष्ट संकेतों की अपेक्षा करनी है। इसके बाद इन सैद्धांतिक निष्कर्षों को सावधानीपूर्वक किए गए प्रयोगों के माध्यम से प्रायोगिक रूप से सत्यापित किया गया, जिससे अध्ययन की विश्वसनीयता और मजबूती सुनिश्चित हुई। यह कार्य क्वांटम सूचना विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।

13 दृश्य

स्रोतों

  • Knowridge Science Report

  • Nature Communications

  • Space Daily

  • Wits University

  • Wits University

  • Wits University

क्या आपने कोई गलती या अशुद्धि पाई?

हम जल्द ही आपकी टिप्पणियों पर विचार करेंगे।