
अंतरिक्ष
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लेखक: Svetlana Velhush

अंतरिक्ष
ब्रह्मांड की उत्पत्ति के सबसे बड़े रहस्य, यानी बिग बैंग और उसके बाद के तीव्र विस्तार (मुद्रास्फीति या inflation) को अब आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत में 'इनफ्लाटन' जैसे कृत्रिम क्षेत्रों या बाहरी गणितीय निर्माणों को जोड़कर समझाने की आवश्यकता नहीं रह गई है। आधुनिक भौतिकी अब इस प्रक्रिया को अधिक स्वाभाविक और मौलिक नियमों के आधार पर देखने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रही है।

कनाडा स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ वाटरलू (University of Waterloo) और पेरिमीटर इंस्टीट्यूट (Perimeter Institute) के सैद्धांतिक भौतिकविदों के एक प्रतिष्ठित समूह ने, जिसमें प्रसिद्ध प्रोफेसर नियायेश अफशोर्दी (Niayesh Afshordi) भी शामिल हैं, 'क्वाड्रेटिक क्वांटम ग्रेविटी' (Quadratic Quantum Gravity) पर आधारित एक नवीन मॉडल प्रस्तुत किया है। यह मॉडल ब्रह्मांड के शुरुआती क्षणों को समझने के लिए एक नया और अधिक सटीक दृष्टिकोण प्रदान करता है।
भौतिकविदों की इस टीम ने 'क्वांटम बाउंस' (Quantum Bounce) का एक ऐसा मॉडल पेश किया है, जो पारंपरिक 'सिंगुलैरिटी' (singularity) की पुरानी अवधारणा को प्रतिस्थापित करता है। यह शोध कार्य ब्रह्मांड विज्ञान के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जो दशकों से चली आ रही गुत्थियों को सुलझाने का दावा करता है।
इस नई थ्योरी के अनुसार, हमारा ब्रह्मांड संभवतः 'शून्य' से अचानक उत्पन्न नहीं हुआ था। इसके विपरीत, यह पिछले किसी ब्रह्मांडीय चरण के अत्यधिक संकुचन (contraction) का परिणाम हो सकता है। यह विचार ब्रह्मांड को एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया के रूप में देखता है, न कि किसी एक बिंदु से शुरू होने वाली घटना के रूप में।
यह सिद्धांत विस्तार की शुरुआत के समय 'अनंत घनत्व' की समस्या को प्रभावी ढंग से हल करता है। पहले भौतिकी में इसे एक ऐसी त्रुटि माना जाता था जिसका कोई समाधान नहीं था, लेकिन अब यह मॉडल स्पष्ट करता है कि विस्तार के आरंभ में घनत्व अनंत क्यों नहीं था, जिससे वैज्ञानिक गणनाओं में सटीकता आई है।
बिग बैंग को अनंत घनत्व और तापमान के एक बिंदु यानी सिंगुलैरिटी के रूप में देखने की पारंपरिक धारणा अब तेजी से अपनी चमक खो रही है। दुनिया के अग्रणी ब्रह्मांड विज्ञानियों ने ऐसे आंकड़े साझा किए हैं जो बताते हैं कि हमारा ब्रह्मांड 'क्वांटम बाउंस' नामक एक चक्रीय प्रक्रिया की उपज है। यह नया अध्ययन सामान्य सापेक्षता और क्वांटम मैकेनिक्स के सिद्धांतों को एक साथ लाता है और यह तर्क देता है कि अंतरिक्ष-समय सातत्य (space-time continuum) का कोई पूर्ण 'आरंभ' नहीं है। इसके बजाय, आज हम जो विस्तार देख रहे हैं, वह वास्तव में संकुचन के एक चरम चरण के बाद की प्रतिक्रिया थी।
इस शोध की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि सिंगुलैरिटी से जुड़ी 'गणितीय आपदा' को समाप्त करना है। 'लूप क्वांटम ग्रेविटी' (Loop Quantum Gravity) के ढांचे के भीतर, अंतरिक्ष-समय की ज्यामिति स्वयं असतत (discrete) है और सूक्ष्म 'क्वांटा' से बनी है। जब पिछले ब्रह्मांड में पदार्थ का घनत्व अपनी महत्वपूर्ण सीमा, जिसे 'प्लैंक घनत्व' (Planck density) कहा जाता है, तक पहुँच गया, तो क्वांटम प्रभावों ने एक अत्यंत शक्तिशाली प्रतिकर्षण बल (repulsion force) उत्पन्न किया। इसी बल ने पतन को एक विस्फोटक विस्तार में बदल दिया। यह खोज हमारे मौलिक प्रश्न को बदल देती है: अब सवाल यह नहीं है कि 'शुरुआत में क्या था?', बल्कि यह है कि 'पिछला चक्र कैसा था?'
अंततः, यह सिद्धांत बिग बैंग की घटना को किसी 'चमत्कार' के बजाय एक अत्यंत स्वाभाविक और भौतिक नियमों के अनुरूप होने वाली प्रक्रिया के रूप में स्थापित करता है। यह मौलिक कानूनों से उपजी एक ऐसी वास्तविकता है जो हमें एक शाश्वत और स्पंदित ब्रह्मांड की ओर ले जाती है, जहाँ अंत ही नए आरंभ का आधार बनता है।
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