स्पेन इस समय मौसम की दोहरी मार झेल रहा है। देश का दक्षिणी क्षेत्र, अंदलूसिया, भीषण गर्मी की चपेट में है, जबकि उत्तर-पूर्वी हिस्से में भारी गरज के साथ बारिश की चेतावनी जारी की गई है। यह स्थिति देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग मौसम के मिजाज को दर्शाती है।
अंदलूसिया में, राष्ट्रीय मौसम विज्ञान एजेंसी (AEMET) ने हुआल्वा प्रांत के लिए पीला अलर्ट जारी किया है, जहाँ 12 सितंबर, 2025 को अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की उम्मीद है। सप्ताहांत तक, सेविले और कॉर्डोबा जैसे शहरों में तापमान 37-38 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। यह गर्मी की लहर देश के दक्षिणी हिस्सों में फैलने की संभावना है, जिससे कई तटीय इलाके भी प्रभावित होंगे।
इसके विपरीत, कैटेलोनिया में 13 सितंबर, 2025 को भारी बारिश और गंभीर गरज के साथ तूफान का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। बार्सिलोना और कोस्टा ब्रावा जैसे क्षेत्रों में कुछ ही घंटों में 60 मिमी तक बारिश हो सकती है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अटलांटिक में उच्च दबाव प्रणाली स्पेन के अधिकांश हिस्सों को स्थिर कर रही है, लेकिन भूमध्य सागर से नमी के कारण उत्तर-पूर्व में तूफान आ रहे हैं, जबकि दक्षिण में गर्मी बढ़ रही है। यह मौसमी विरोधाभास जलवायु परिवर्तन के व्यापक प्रभावों का भी संकेत देता है। हाल के वर्षों में, स्पेन ने चरम मौसम की घटनाओं का अनुभव किया है, जिसमें विनाशकारी बाढ़ और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की लहरें शामिल हैं। 2025 की गर्मियों में, स्पेन ने रिकॉर्ड तोड़ गर्मी का अनुभव किया, जिसमें सेविले ने 1951 के बाद से सितंबर में अपना उच्चतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया।
यह स्थिति जलवायु परिवर्तन के कारण चरम मौसम की घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति और तीव्रता को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण ऐसी घटनाएं अधिक गंभीर और लगातार हो सकती हैं। यह दोहरा मौसम पैटर्न न केवल निवासियों के लिए बल्कि पर्यटन और कृषि जैसे क्षेत्रों के लिए भी चुनौतियां पेश करता है। जहां एक ओर भीषण गर्मी से जल स्रोतों पर दबाव बढ़ सकता है, वहीं दूसरी ओर भारी बारिश से फसलों को नुकसान और बुनियादी ढांचे पर असर पड़ सकता है। स्पेन, जो यूरोप के लिए फलों और सब्जियों का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है, ऐसे चरम मौसम से प्रभावित हो सकता है, जिसका असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ सकता है। यह स्थिति भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए बेहतर तैयारी और अनुकूलन रणनीतियों की आवश्यकता पर बल देती है।



