❓ सवाल:
क्या किया जाए अगर मैं खुद को कहीं भी काम करते हुए नहीं देख पा रही हूँ, लेकिन पैसों की ज़रूरत तो है ही? मैं बस घूमना-फिरना और मौज-मस्ती करना चाहती हूँ, और अपनी मर्जी के हिसाब से जीना चाहती हूँ, पर नतीजा यह है कि मैं बिना नौकरी और पैसे के घर पर बैठी हूँ, और जल्द ही रहने का ठिकाना भी नहीं बचेगा।
❗️ ली (lee) का जवाब:
खैर, आपने खुद ही उस धारणा का वर्णन किया है जो आपको रोके हुए है: "काम से ही पैसा आता है"। इसके बाद आपकी एक और धारणा है "मैं काम नहीं करना चाहती" और इन दोनों का तार्किक मेल यह निकलता है - "काम नहीं = पैसा नहीं"।
अपने सपने को हकीकत में बदलने के लिए काम या प्रायोजकों जैसे "बिचौलियों" पर ध्यान देने की ज़रूरत नहीं है। अपना सारा ध्यान विशेष रूप से अपने सपने पर ही लगाएं। मनचाही चीज़ पर ध्यान केंद्रित करने से ही वह आपको मिल पाती है।
लेकिन!
उन कार्यों पर ध्यान देना जो (आपकी राय में) मंज़िल तक ले जाने चाहिए, वे केवल गतिविधियों के एक समूह के अलावा और कुछ भी नहीं बनाएंगे। अक्सर इसी "गतिविधियों के समूह" को ही "काम" कहा जाता है। इस संदर्भ में "काम" अभाव की स्थिति में मन द्वारा गढ़ी गई गतिविधियों के लिए अपनी इच्छाओं को त्यागने का एक जरिया है।
वे सभी लोग जो जोश, प्रेरणा और उत्साह के साथ अपना पसंदीदा काम करते हैं, उन्हें कभी "काम" का बोझ महसूस नहीं होता और वे किसी न किसी तरह पैसा कमा ही लेते हैं। वे मशहूर हस्तियां जिन्होंने शून्य से शुरुआत कर खुद को बनाया है, वे हमेशा इसी तरह जीती हैं।




