13 अक्टूबर, 2025 को, वेनेज़ुएला की सरकार ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम उठाते हुए नॉर्वे और ऑस्ट्रेलिया में अपने दूतावासों को बंद करने का निर्णय लिया। यह कार्रवाई विदेशी सेवा के भीतर 'संसाधनों के रणनीतिक पुनर्वितरण' के हिस्से के रूप में की गई है, जिसका उद्देश्य देश की वैश्विक उपस्थिति को अनुकूलित करना है। इस पुनर्गठन के साथ ही, निकोलस मादुरो की सरकार ने अफ्रीका में नए राजनयिक मिशन स्थापित करने की योजना बनाई है, विशेष रूप से बुर्किना फासो और ज़िम्बाब्वे में।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब वेनेज़ुएला और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव कई हफ्तों से बढ़ रहा है, और यह कदम उस व्यापक भू-राजनीतिक बदलाव को दर्शाता है जहाँ वेनेज़ुएला 'ग्लोबल साउथ' के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया कि बुर्किना फासो और ज़िम्बाब्वे में नए दूतावास 'उपनिवेशवाद-विरोधी संघर्ष और आधिपत्यवादी दबावों के प्रतिरोध में रणनीतिक सहयोगी' के रूप में कार्य करेंगे। ये मिशन कृषि, ऊर्जा, शिक्षा और खनन जैसे क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं को बढ़ावा देंगे।
इस घोषणा की समय-सीमा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वेनेज़ुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने के कुछ ही दिनों बाद हुई है। मचाडो को लोकतंत्र को बढ़ावा देने के उनके अथक प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया था, और उन्होंने इस पुरस्कार को वेनेज़ुएला के पीड़ित लोगों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को समर्पित किया, उनके 'निर्णायक समर्थन' के लिए आभार व्यक्त किया। नॉर्वे के विदेश मंत्रालय ने दूतावास बंद करने की सूचना की पुष्टि की और इसे 'खेदजनक' बताया, साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि नोबेल पुरस्कार नॉर्वेजियाई सरकार से स्वतंत्र है।
नॉर्वे और ऑस्ट्रेलिया जैसे पश्चिमी देशों से दूरी बनाना और अफ्रीका के 'भाईचारे वाले देशों' के साथ संबंध मजबूत करना, बाहरी दबावों के बीच आत्म-निर्भरता और संप्रभुता की रक्षा के लिए एक सचेत चयन को दर्शाता है। वेनेज़ुएला अपने संसाधनों को उन क्षेत्रों में केंद्रित कर रहा है जहाँ उसे वैचारिक और रणनीतिक समर्थन मिलने की संभावना है, जो वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।




