विश्व व्यापार मंच पर एक अभूतपूर्व घटनाक्रम में, संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10 अक्टूबर, 2025 को चीन से आने वाले सभी आयातों पर 100 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की। यह कठोर कदम चीन द्वारा दुर्लभ पृथ्वी खनिजों के निर्यात पर हाल ही में लगाए गए नियंत्रणों की सीधी प्रतिक्रिया है। इस घोषणा ने तत्काल बाजार में उथल-पुथल मचा दी, जिसके परिणामस्वरूप 10 अक्टूबर, 2025 को एस एंड पी 500 सूचकांक में 2.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो अप्रैल के बाद से सबसे बड़ी एक-दिवसीय गिरावट थी। यह स्थिति दो प्रमुख शक्तियों के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक व्यापार और आर्थिक स्थिरता के लिए एक गंभीर चुनौती प्रस्तुत करती है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन के इस रुख को 'असाधारण रूप से आक्रामक' बताया है, विशेष रूप से दुर्लभ पृथ्वी तत्वों पर नियंत्रण के संदर्भ में, जिनका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) और रक्षा उपकरणों के निर्माण में होता है। चीन, जो इन महत्वपूर्ण खनिजों के वैश्विक खनन और प्रसंस्करण में एक बड़ा हिस्सा रखता है, ने हाल ही में होल्मियम, एर्बियम, थुलियम, यूरोपियम और यटरबियम सहित अतिरिक्त खनिजों पर निर्यात प्रतिबंध लगाए हैं। चीन के वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी नियमों के अनुसार, अब विदेशी कंपनियों को ऐसे किसी भी उत्पाद का निर्यात करने से पहले विशेष मंजूरी लेनी होगी, जिसमें चीन से प्राप्त रेयर अर्थ तत्वों की थोड़ी भी मात्रा शामिल हो। यह आर्थिक टकराव रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये खनिज आधुनिक तकनीक के लिए अपरिहार्य हैं।
इस आर्थिक टकराव की छाया में, कूटनीतिक संवाद के भविष्य पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह दो सप्ताह बाद सियोल, दक्षिण कोरिया में होने वाले एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपनी निर्धारित बैठक को रद्द कर सकते हैं, क्योंकि उनके अनुसार अब आगे बढ़ने का कोई औचित्य नहीं बचा है। APEC, जो 21 प्रशांत तटीय अर्थव्यवस्थाओं का एक महत्वपूर्ण मंच है, ऐसे समय में एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक खोने के जोखिम का सामना कर रहा है जब क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को सहयोग की आवश्यकता है। APEC 2025 कोरिया शिखर सम्मेलन नवंबर 2025 में आयोजित होने वाला है।
यह टैरिफ वृद्धि, जो 1 नवंबर, 2025 से प्रभावी होनी है, केवल आर्थिक नहीं, बल्कि एक रणनीतिक कदम के रूप में भी देखी जा रही है, जिसका उद्देश्य घरेलू उद्योगों को सुरक्षा प्रदान करना और चीन पर निर्भरता को कम करना है। इसके अतिरिक्त, ट्रंप प्रशासन ने महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर के निर्यात पर भी नियंत्रण लागू करने की घोषणा की है, जिससे चीन के कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और रक्षा प्रौद्योगिकी क्षेत्रों को सीमित किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चीन जवाबी कार्रवाई करता है, तो इसका असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।



