बुधवार, 7 जनवरी 2026 को, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वाशिंगटन डीसी में एक महत्वपूर्ण ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस आदेश में संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों में अपनी भागीदारी और वित्त पोषण को तत्काल समाप्त करने का निर्देश दिया गया था। यह कदम, जो उनके 'अमेरिका पहले' सिद्धांत का एक स्पष्ट प्रदर्शन था, वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लेने के लिए अमेरिकी सैन्य अभियान के कारण तनावपूर्ण हुए अंतरराष्ट्रीय माहौल के बीच उठाया गया। मादुरो, जो 2013 से नाममात्र के राष्ट्रपति पद पर आसीन थे, को हटाने की कार्रवाई ने वैश्विक मंच पर हलचल मचा दी थी।
ट्रम्प प्रशासन ने इस निर्णय को सही ठहराते हुए कहा कि इन वैश्विक ढाँचों में बने रहना अब अमेरिकी हितों, सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि या संप्रभुता के अनुकूल नहीं है। यह स्पष्ट संकेत था कि अमेरिका अब बहुपक्षीय समझौतों को अपने राष्ट्रीय एजेंडे के अधीन रखेगा। इस नीतिगत बदलाव का सीधा असर उन सभी अंतरराष्ट्रीय निकायों पर पड़ा, जिन्हें अमेरिका समर्थन देता रहा था।
जारी किए गए आदेश के अनुसार, सभी कार्यकारी विभागों और एजेंसियों को न्यूनतम संभव समय सीमा के भीतर इन संगठनों के साथ सभी प्रकार के संपर्क और वित्तीय सहायता को रोकना होगा। विश्लेषण से पता चलता है कि जिन 66 संगठनों से अमेरिका अलग हो रहा है, उनमें से 31 संयुक्त राष्ट्र (UN) की संरचनाओं से संबंधित हैं, जबकि शेष 35 स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय निकाय हैं। व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि इनमें से कई संगठन ऐसी 'कट्टरपंथी जलवायु नीतियों, वैश्विक शासन और वैचारिक कार्यक्रमों' को बढ़ावा दे रहे थे, जो वाशिंगटन की वर्तमान प्राथमिकताओं से सीधे टकराते थे।
इस अलगाव की प्रक्रिया में कुछ महत्वपूर्ण संस्थाओं से बाहर निकलना शामिल है। इनमें संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) और जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल (IPCC) प्रमुख हैं। यह कदम पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका के पिछले हटने की प्रवृत्ति को आगे बढ़ाता है। विदेश सचिव मार्को रुबियो ने बहुपक्षवाद से इस दूरी को उन लक्षित संस्थानों पर केंद्रित 'प्रगतिशील' एजेंडा थोपने की प्रतिक्रिया बताया।
हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय संकट समूह के रिचर्ड गोवन ने इस कार्रवाई पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने टिप्पणी की कि संयुक्त राज्य अमेरिका उन संरचनाओं से मुँह मोड़ रहा है जो अंतरराष्ट्रीय कानून और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए काम करती हैं। गोवन ने विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) और लैंगिक समानता से संबंधित निकायों का उल्लेख किया, जिन्हें अमेरिका का समर्थन प्राप्त था। यह निर्णय वैश्विक सहयोग के भविष्य पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
कुल मिलाकर, राष्ट्रपति ट्रम्प का यह कदम स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि उनकी विदेश नीति अब राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखने पर केंद्रित है, भले ही इसके लिए दशकों पुराने अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों को तोड़ना पड़े। वेनेज़ुएला में चल रहे सैन्य हस्तक्षेप के बीच यह घोषणा एक शक्तिशाली राजनीतिक संदेश देने का काम करती है कि अमेरिका अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है, भले ही इसके लिए वैश्विक मंच पर अकेला पड़ना पड़े।




