लेबनान के फिलिस्तीनी शरणार्थी शिविरों में फिलिस्तीनी गुटों का निरस्त्रीकरण एक महत्वपूर्ण और जटिल प्रक्रिया के रूप में सामने आया है। अगस्त 2025 में शुरू हुई इस पहल का उद्देश्य लेबनानी सेना के साथ हथियारों का केंद्रीकरण करना है, जो दिसंबर 2025 तक पूरा होने की उम्मीद है। यह कदम मई 2025 में फिलिस्तीनी प्राधिकरण के राष्ट्रपति महमूद अब्बास और लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन के बीच हुए एक समझौते का परिणाम है, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया कि केवल लेबनानी राज्य के पास ही हथियार होने चाहिए।
यह निरस्त्रीकरण प्रक्रिया बेरुत के बुर्ज अल-बराजेह शिविर से शुरू हुई और तब से ऐन अल-हिलवेह और बेदावी जैसे अन्य शिविरों तक फैल गई है। अब तक व्यक्तिगत राइफलों, पिस्तौलों, रॉकेट-चालित ग्रेनेड, मशीन गन और हैंड ग्रेनेड सहित विभिन्न प्रकार के हथियारों को लेबनानी सेना को सौंपा गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका के विशेष दूत टॉम बैरक ने इस प्रक्रिया को 'एकता और स्थिरता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम' बताते हुए इसकी प्रशंसा की है।
हालांकि, इस प्रक्रिया में कई चुनौतियाँ भी हैं। हमास और इस्लामिक जिहाद जैसे कुछ गुटों ने हथियारों को सौंपने में अनिच्छा दिखाई है। हमास का कहना है कि उसके हथियार फिलिस्तीनी मुद्दे से जुड़े हैं और जब तक इजरायली कब्जा जारी रहेगा, तब तक वे बने रहेंगे। इन गुटों ने सुरक्षा गारंटी और लेबनान में फिलिस्तीनी शरणार्थियों के नागरिक और मानवाधिकारों में सुधार की भी मांग की है। लेबनान सरकार इन गुटों को समझाने के लिए बातचीत जारी रखे हुए है, और उम्मीद है कि सितंबर 2025 के अंत तक यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
ऐतिहासिक रूप से, लेबनान में फिलिस्तीनी गुटों की उपस्थिति दशकों पुरानी है, जो 1948 में इजराइल की स्थापना के बाद फिलिस्तीनियों के विस्थापन से जुड़ी है। ये गुट दशकों से शिविरों के भीतर सुरक्षा और नियंत्रण बनाए हुए थे, जो काफी हद तक राज्य के अधिकार क्षेत्र से बाहर थे। लेबनान की सरकार इस निरस्त्रीकरण को अपनी संप्रभुता को मजबूत करने और देश में सुरक्षा को केंद्रीकृत करने के एक बड़े प्रयास के हिस्से के रूप में देखती है। यह पहल हिजबुल्लाह जैसे अन्य गैर-राज्य समूहों के निरस्त्रीकरण के व्यापक संदर्भ में भी देखी जा रही है।
लेबनान में लगभग 222,000 फिलिस्तीनी शरणार्थी रहते हैं, जिनमें से कई भीड़भाड़ वाले शिविरों में रहते हैं जो राज्य के नियंत्रण से बाहर हैं। इस प्रक्रिया की सफलता लेबनान में स्थिरता और फिलिस्तीनी शरणार्थी समुदाय के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।




