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सुमीत टापू की नई 'हनुमान चालीसा': एक दिव्य आर्केस्ट्रा अनुभव
द्वारा संपादित: Inna Horoshkina One
सुप्रसिद्ध गायक और मानवतावादी सुमीत टापू (Sumeet Tappoo) ने 'हनुमान चालीसा' का एक नया और अनूठा संस्करण प्रस्तुत किया है। यह आध्यात्मिक रचना जनवरी 2026 में प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जारी की गई, जिसे प्रसिद्ध म्यूजिक लेबल टी-सीरीज (T-Series) के सहयोग से दुनिया के सामने लाया गया है। कई डिजिटल मंचों पर इस विशेष रिलीज की आधिकारिक तारीख 6 जनवरी 2026 दर्ज की गई है, जो भक्ति संगीत के क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है।
यह प्रस्तुति केवल एक पारंपरिक भजन का गायन नहीं है, बल्कि सुमीत टापू ने इसे एक विशेष 'सांस लेने वाली' और ध्यानमग्न (meditative) ध्वनि के साथ तैयार किया है। उन्होंने जानबूझकर इस चालीसा को सामान्य लयबद्ध गति से हटाकर एक शांत और गहरे अनुभव में बदल दिया है। यहाँ प्रार्थना केवल ऊर्जा का संचार नहीं करती, बल्कि सुनने वाले के भीतर शांति और सुकून का एक विशाल स्थान निर्मित करती है।
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी कलात्मक विशेषता इसका भव्य आर्केस्ट्रा और सिम्फोनिक संगीत है। इस रचना को पंडित भवदीप जयपुरवाले (Pt. Bhavdeep Jaipurwale) ने खूबसूरती से व्यवस्थित किया है, जबकि संजय जयपुरवाले (Sanjay Jaipurwale) ने इसके निर्माता के रूप में अपनी भूमिका निभाई है। संगीत के इस ताने-बाने में गिटार और सितार जैसे वाद्ययंत्रों का समावेश किया गया है, जो पारंपरिक और आधुनिक ध्वनियों का एक अद्भुत संगम पेश करते हैं।
संगीत की यह व्यवस्था प्रार्थना को केवल सहारा नहीं देती, बल्कि इसे एक नया विस्तार प्रदान करती है। इसमें इस्तेमाल किए गए वायलिन और अन्य वाद्ययंत्रों का समूह एक आंतरिक गुंबद जैसा प्रभाव पैदा करता है, जहाँ सुमीत टापू की आवाज केंद्र में रहती है। आर्केस्ट्रा एक कोमल आवरण की तरह काम करता है, जो सुनने वाले के ध्यान को भटकने नहीं देता और उसे एक गहरे आध्यात्मिक प्रवाह में बांधे रखता है।
इस कृति की तकनीकी उत्कृष्टता के पीछे उद्योग के अनुभवी विशेषज्ञों की एक टीम है। पार्थ दुबे (Parth Dubey) ने सुमीत टापू की आवाज को रिकॉर्ड किया है, जबकि कोहिनूर मुखर्जी (Kohinoor Mukherjee) ने इसके मिक्सिंग और मास्टरिंग का कार्य संभाला है। मुखर्जी को स्वतंत्र संगीत और तकनीकी इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उनकी बेहतरीन उपलब्धियों के लिए पहले भी काफी सराहना मिल चुकी है, और इस प्रोजेक्ट में भी उनकी कुशलता स्पष्ट रूप से झलकती है।
टी-सीरीज, जो भारत की सबसे बड़ी संगीत कंपनियों में से एक है, की स्थापना 11 जुलाई 1983 को गुलशन कुमार द्वारा की गई थी। वर्तमान में भूषण कुमार के नेतृत्व में यह लेबल वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाए हुए है। टी-सीरीज के पास भक्ति संगीत के लिए समर्पित विशेष चैनल हैं, जो इस तरह की आध्यात्मिक रिलीज को दुनिया भर के करोड़ों श्रोताओं तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
'हनुमान चालीसा' का यह संस्करण सुमीत टापू की निरंतर आध्यात्मिक यात्रा का एक हिस्सा है। वर्ष 2026 की उनकी अन्य रिलीज में 'हे अंजनी के लाला' (Hey Anjani Ke Lala) भी शामिल है, जो विभिन्न स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। ये रचनाएँ दर्शाती हैं कि कलाकार किस तरह अपनी कला के माध्यम से भक्ति और शांति का संदेश फैला रहे हैं।
अंततः, हनुमान चालीसा का यह नया रूप केवल एक संगीत ट्रैक नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अभ्यास की तरह महसूस होता है। इसे दुनिया के किसी भी कोने में बैठे श्रोता के लिए एक ध्यानपूर्ण अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है। टी-सीरीज के माध्यम से इसका वैश्विक वितरण इस प्रार्थना के अर्थ को और अधिक सशक्त बनाता है, जिससे यह वैश्विक स्तर पर सुलभ होते हुए भी व्यक्तिगत स्तर पर अत्यंत आत्मीय बनी रहती है।
स्रोतों
Asian News International (ANI)
The Tribune
The Tribune
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