तेलुगु ड्रामा 'पोद्रुगा': विषाक्त रिश्तों की पड़ताल

द्वारा संपादित: An goldy

तेलुगु भाषा की ड्रामा फिल्म 'पोद्रुगा' (Podruga) का प्रीमियर 7 नवंबर, 2025 को हुआ था। इस फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में रश्मिका मंदाना और दीक्षित शेट्टी ने दर्शकों के सामने एक जटिल कहानी पेश की। निर्देशक राहुल रविंद्रन, जिन्होंने इसकी पटकथा भी लिखी है, ने प्रेम कहानी को एक परी कथा के रूप में प्रस्तुत किया। हालांकि, यह कहानी जल्द ही एक विनाशकारी मोड़ लेती है, जब पुरुष पात्र का आक्रामक व्यवहार प्रमुखता से सामने आता है, जिससे रिश्तों में तनाव पैदा होता है।

यह सिनेमाई कृति प्रेम, भेद्यता (vulnerability) और आत्म-खोज की प्रक्रिया जैसे गहरे विषयों को छूती है। दर्शकों की प्रतिक्रियाएँ इस फिल्म को लेकर विभाजित रहीं, जो मानव अनुभव की बहुआयामी प्रकृति को दर्शाती हैं। फिर भी, रश्मिका मंदाना के अभिनय को उसकी भावनात्मक गहराई और ईमानदारी के लिए व्यापक प्रशंसा मिली है। आलोचकों ने कहानी की गति में कुछ असमानता (unevenness) का उल्लेख किया, लेकिन पांच भाषाओं में फिल्म का व्यापक प्रदर्शन यह दर्शाता है कि यह विभिन्न प्रकार के दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाना चाहती है। बहुभाषी रिलीज का यह निर्णय भाषाई बाधाओं को पार करते हुए एक महत्वपूर्ण संदेश को अधिकतम लोगों तक पहुंचाने की इच्छा को स्पष्ट करता है।

निर्देशक राहुल रविंद्रन ने दीक्षित शेट्टी को एक महत्वपूर्ण भूमिका के लिए जानबूझकर चुना, जो मुख्यधारा के सिनेमा में हावी रहने वाली स्थापित छवियों से हटकर एक साहसिक कदम था। इस फिल्म को अत्यधिक वीरत्वपूर्ण और प्रभुत्वशाली पुरुष कथाओं के विपरीत एक ताज़ा प्रतिपक्ष (refreshing counterpoint) के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो अक्सर समकालीन भारतीय सिनेमा में देखने को मिलती हैं। इसकी हिम्मत न केवल दम घोंटने वाले रिश्तों के विषय को उठाने में है, बल्कि उन सूक्ष्म, शांत विवरणों को भी उजागर करने में है जिन्हें आमतौर पर बॉक्स ऑफिस सफलता के लिए बहुत विशिष्ट (niche) माना जाता है।

उदाहरण के लिए, रश्मिका द्वारा अभिनीत चरित्र, भूमा देवी, जो एक स्नातकोत्तर छात्रा है, अपने साहित्यिक संदर्भों के माध्यम से अपने आंतरिक संसार की रूपरेखा को प्रकट करती है। इसमें वर्जीनिया वूल्फ की कृति “ए रूम ऑफ वन्स ओन” (A Room of One's Own) का उल्लेख शामिल है, जो दर्शकों को उसके मन की गहराई में झाँकने का अवसर प्रदान करता है। यह फिल्म इस बात का एक कालातीत और बहुस्तरीय अन्वेषण प्रस्तुत करती है कि कैसे बचपन के अनुभव वयस्क संबंधों को आकार देते हैं। यह दर्शकों को अपनी भावनात्मक परिपक्वता और लगाव की अवधारणा के प्रति अपने दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित करती है।

यह फिल्म एक दर्पण का काम करती है, जो उन आंतरिक पैटर्नों को दर्शाता है जिनमें परिवर्तन की आवश्यकता है। यह अपनी प्रतिक्रियाओं और विकल्पों की गहरी समझ का मार्ग खोलती है, जिससे दर्शकों को व्यक्तिगत परिदृश्यों पर पुनर्विचार करने की शक्ति मिलती है। समीक्षकों का मानना है कि 2025 में फिल्म का रिलीज होना आज जितना प्रासंगिक है, उतना ही यह एक दशक पहले भी होता, और संभवतः भविष्य में भी इसका महत्व बना रहेगा। यह तथ्य उठाए गए विषयों की सार्वभौमिकता और कालातीत अपील को रेखांकित करता है।

स्रोतों

  • Hindustan Times

  • Filmibeat

  • Telugu Times

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