टूथपेस्ट को निचोड़ने की दैनिक क्रिया एक जटिल भौतिकी सिद्धांत को प्रदर्शित करती है: सामग्रियों की लगाए गए बलों पर प्रतिक्रिया करने का तरीका। टूथपेस्ट निचोड़ने पर बहता है, लेकिन स्थिर रहने पर अपना आकार बनाए रखता है, जो ठोस और तरल पदार्थों के पारंपरिक वर्गीकरण को चुनौती देता है। ये सामग्रियां, जिनमें जैल और क्रीम शामिल हैं, 'नरम पदार्थ' (सॉफ्ट मैटर) नामक श्रेणी से संबंधित हैं, जो ठोस और तरल दोनों के गुण दर्शाती हैं। इन पदार्थों का अंतर उनकी आंतरिक संरचना में निहित है, जो तरल में निलंबित बूंदों या लंबी मैक्रोमोलेक्यूल्स जैसे बड़े घटकों से बनी होती है। ये संरचनाएं कमजोर, आसानी से बाधित होने वाले बलों द्वारा एक साथ रखी जाती हैं, जो उन्हें बाहरी तनाव के प्रति संवेदनशील लेकिन अत्यधिक अनुकूलनीय बनाती हैं।
सामग्री की प्रतिक्रिया बल के परिमाण और उस समय सीमा दोनों पर निर्भर करती है जिसके भीतर बल लगाया जाता है। एक अचानक दबाव टूथपेस्ट को आसानी से प्रवाहित करता है क्योंकि संरचना का आंतरिक नेटवर्क तेजी से पुनर्व्यवस्थित होता है। इसी तरह, शैम्पू को हिलाने से उसके कीड़े जैसे अणु संरेखित हो जाते हैं, जिससे प्रवाह प्रतिरोध कम हो जाता है। भौतिक विज्ञानी इस बल और समय-निर्भर व्यवहार का अध्ययन 'रियोलॉजी' के क्षेत्र में करते हैं, जो तनाव के तहत विरूपण और प्रवाह की जांच करता है। यह अवधारणा हेराक्लिटस की प्राचीन यूनानी कहावत 'panta rhei' की प्रतिध्वनि करती है, जिसका अर्थ है 'सब कुछ बहता है'।
इस सिद्धांत का सबसे प्रसिद्ध प्रदर्शन क्वींसलैंड विश्वविद्यालय में पिच ड्रॉप प्रयोग है, जिसे 1927 में थॉमस पार्नेल द्वारा शुरू किया गया था। यह प्रयोग पिच की श्यानता (विस्कोसिटी) का परीक्षण करता है, जिसे ठोस माना जाता है, लेकिन इसे पानी की तुलना में 100 अरब गुना अधिक श्यानता वाला तरल माना जाता है। 1930 में फ़नल का सिरा काटे जाने के बाद से, केवल नौ बूंदें गिरी हैं, अंतिम बूंद अप्रैल 2014 में दर्ज की गई थी। यह प्रयोग अब प्रोफेसर एंड्रयू व्हाइट की देखरेख में है, जो तीसरे संरक्षक हैं, और दसवीं बूंद के 2020 के दशक के अंत में आने की उम्मीद है। यूक्यू प्रयोग प्रयोगशाला प्रदर्शनों की सबसे लंबी अवधि के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड रखता है।
रियोलॉजी, जिसकी उत्पत्ति 1920 में यूजीन सी. बिंघम द्वारा की गई थी, सामग्री के प्रवाह और विरूपण का विज्ञान है, जो ठोस यांत्रिकी और द्रव गतिकी के सिद्धांतों को समाहित करता है। यह खाद्य, सौंदर्य प्रसाधन और फार्मास्यूटिकल्स जैसे उद्योगों में अनुप्रयोग पाता है, जिससे उत्पाद बनावट और प्रसंस्करण स्थितियों का अनुकूलन होता है। टूथपेस्ट जैसे गैर-न्यूटनियन तरल पदार्थ वे होते हैं जिनकी श्यानता अपरूपण दर के साथ बदलती है, जो पानी जैसे न्यूटनियन तरल पदार्थों से भिन्न है, जिनकी श्यानता स्थिर रहती है। नरम पदार्थ भौतिकी, जो लचीले, विकृत होने योग्य और जटिल व्यवहार से भरे पदार्थों का अध्ययन करती है, आधुनिक प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी को आकार देने वाले महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है।
डॉ. इंद्रेश यादव, जो आईआईटी-भुवनेश्वर में सहायक प्रोफेसर और एमआईटी में रिसर्च एफिलिएट हैं, नरम पदार्थ पर अपना काम जारी रखे हुए हैं। रियोलॉजी के क्षेत्र में अनुसंधान सक्रिय बना हुआ है, जिसे जनवरी 2026 में 'फ्यूचर ऑफ रियोलॉजी' संगोष्ठी जैसे आयोजनों से उजागर किया गया है। इसके अतिरिक्त, अप्रैल 2026 में नीदरलैंड के ब्रेडा में रियोलॉजी कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जिनका उद्देश्य ग्राहकों को श्यानता और लोच जैसे विषयों में शिक्षित करना है। रोजमर्रा के उत्पादों का अध्ययन आधुनिक भौतिकी के एक समृद्ध अध्याय को प्रकट करता है जो संरचना और प्रवाह के बीच संतुलन से संबंधित है।



