La Nina set to bring arctic plunge, heavy snow to millions in preview of frigid winter to come trib.al/acI6CHd
La Nina लाखों लोगों के लिए आर्कटिक ठंड और भारी बर्फ़बारी लेकर आ रही है, आने वाले कड़ी सर्दी की झलक के रूप में.
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द्वारा संपादित: Tetiana Martynovska
La Nina set to bring arctic plunge, heavy snow to millions in preview of frigid winter to come trib.al/acI6CHd
La Nina लाखों लोगों के लिए आर्कटिक ठंड और भारी बर्फ़बारी लेकर आ रही है, आने वाले कड़ी सर्दी की झलक के रूप में.
उत्तरी ध्रुव से एक प्रबल शीत वायु राशि के पृथ्वी के विशाल भूभागों पर उतरने की आशंका है, जिससे तापमान में अप्रत्याशित और तीव्र गिरावट दर्ज की जा सकती है। यह घटना मौसम के सामान्य प्रवाह में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती है, जिसके लिए सभी को सतर्क रहने की आवश्यकता है। इस तीव्र शीतलन के प्रभाव स्वरूप, सुबह के समय न्यूनतम तापमान संभवतः -1 से 7 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है, जबकि दिन का अधिकतम तापमान भी सामान्य से काफी कम, केवल 13 से 18 डिग्री सेल्सियस तक ही पहुँच पाएगा। यह विचलन सामान्य मौसमी मानकों से स्पष्ट रूप से हटकर है।
यह आर्कटिक का हस्तक्षेप वायुमंडलीय स्थितियों को प्रभावित करेगा, जिससे हवा की गति में वृद्धि हो सकती है और थर्मामीटर पर दर्ज तापमान भले ही मध्यम रूप से कम हो, फिर भी वास्तविक अनुभव में ठंडक अधिक महसूस हो सकती है। यह मौसमी उथल-पुथल अगले 48 घंटों के भीतर वैश्विक मौसम प्रणालियों पर अपना असर डाल सकती है। यह स्थिति बाहरी परिस्थितियों में अचानक ठंडक का अनुभव कराती है, जो आंतरिक स्थिरता और सामंजस्य पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर प्रदान करती है।
वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि आर्कटिक क्षेत्र, जिसे 'तीसरा ध्रुव' भी कहा जाता है, पृथ्वी के बाकी हिस्सों की तुलना में लगभग चार गुना अधिक तेज़ी से गर्म हो रहा है, जिसे आर्कटिक प्रवर्धन कहा जाता है। यह तीव्र तापन समुद्री बर्फ के पिघलने को बढ़ावा देता है, जिससे समुद्र अधिक सौर विकिरण अवशोषित करता है, जो एक सकारात्मक प्रतिक्रिया चक्र बनाता है। उदाहरण के लिए, 1979 से सितंबर में आर्कटिक समुद्री बर्फ में प्रति दशक लगभग 13% की गिरावट दर्ज की गई है। यह घटना दर्शाती है कि कैसे एक क्षेत्र में होने वाला बदलाव पूरे वैश्विक ताने-बाने को प्रभावित करता है।
कोलंबिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन के अनुसार, 1955 से 2005 के बीच वैश्विक तापमान वृद्धि के एक तिहाई हिस्से के लिए आर्कटिक का तापमान बढ़ना जिम्मेदार था, जिसके कारण समुद्री बर्फ के आधे से अधिक हिस्से को नुकसान हुआ। यह भी पाया गया है कि ओजोन को नुकसान पहुँचाने वाले पदार्थों (ODS) का जलवायु पर गहरा प्रभाव पड़ा है, और मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल जैसे वैश्विक सहयोग ने इन पदार्थों को कम करके जलवायु शमन में योगदान दिया है। यह दिखाता है कि साझा उद्देश्य के लिए एकजुट होने पर इकाइयाँ बड़े पैमाने पर संतुलन बहाल कर सकती हैं।
इस अचानक तापमान परिवर्तन के समय, यह समझना महत्वपूर्ण है कि हम किस प्रकार की जानकारी को अपने भीतर ग्रहण कर रहे हैं। जिस प्रकार आर्कटिक की बर्फ पिघलने से वातावरण में कार्बन और मीथेन जैसी गैसें निकलती हैं, उसी प्रकार समाचार और विचार हमारे आंतरिक वातावरण को प्रभावित करते हैं। भय और अनिश्चितता से भरी जानकारी का निरंतर सेवन हमारे आंतरिक संतुलन को बिगाड़ सकता है, जबकि रचनात्मकता और सहयोग की कहानियों पर ध्यान केंद्रित करना आंतरिक सामंजस्य को बढ़ावा देता है। यह क्षण हमें अपने सूचना आहार के प्रति सचेत होने और उस वास्तविकता का निर्माण करने का आह्वान करता है जिसमें हम जीना चाहते हैं।
연합뉴스
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Spring is expected to officially arrive in Japan this week with the start of the #CherryBlossom season. According to the Japanese Meteorological Agency the blooms will arrive earlier this year because of a warmer than average winter. 🌸🌸🌸