पृथ्वी के गर्भ में छिपा हो सकता है हाइड्रोजन का एक विशाल और रहस्यमयी भंडार

लेखक: Inna Horoshkina One

आंतरिक कोर

फरवरी 2026 में सामने आए एक क्रांतिकारी शोध ने पृथ्वी की आंतरिक संरचना के बारे में हमारी समझ को एक नया आयाम दिया है। इस अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि पृथ्वी के कोर (केंद्र) में हाइड्रोजन की एक अविश्वसनीय मात्रा मौजूद हो सकती है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह भंडार हमारे ग्रह के सभी महासागरों में उपलब्ध कुल हाइड्रोजन की तुलना में 45 गुना तक अधिक हो सकता है, जो एक विस्मयकारी तथ्य है।

इस महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि के पीछे पेकिंग यूनिवर्सिटी (Peking University) और ईटीएच ज्यूरिख (ETH Zurich) के शोधकर्ताओं का अथक प्रयास है। इन विशेषज्ञों ने पृथ्वी के कोर के निर्माण के दौरान उत्पन्न होने वाली चरम स्थितियों को समझने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया। उन्होंने प्रयोगशाला के भीतर उन भीषण दबावों और तापमानों का सफलतापूर्वक अनुकरण किया जो हमारे ग्रह की गहराइयों में पाए जाते हैं।

इस शोध की सबसे खास बात 'एटम-प्रोब टोमोग्राफी' (atom-probe tomography) पद्धति का उपयोग है। इस उन्नत तकनीक की मदद से वैज्ञानिकों ने परमाणु स्तर पर पदार्थों का विश्लेषण किया, जिससे उन्हें यह समझने में मदद मिली कि पृथ्वी के शुरुआती दौर में तत्वों का व्यवहार कैसा रहा होगा। यह विधि जटिल वैज्ञानिक डेटा को स्पष्टता प्रदान करने में सहायक सिद्ध हुई है।

वैज्ञानिक सिमुलेशन और मॉडलिंग के परिणामों ने यह स्पष्ट किया है कि जब पृथ्वी अपने प्रारंभिक निर्माण चरण में थी, तब हाइड्रोजन केवल बाहरी परतों तक सीमित नहीं था। इसके बजाय, यह सिलिकॉन और ऑक्सीजन जैसे तत्वों के साथ मिलकर लोहे के कोर में घुलने में सक्षम था। यह प्रक्रिया ग्रह के विकास के शुरुआती घंटों और दिनों में घटित हुई होगी।

इस खोज के दूरगामी परिणाम सामने आए हैं, जिन्हें निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:

  • हाइड्रोजन का पृथ्वी पर आगमन केवल बाद के कालखंड में धूमकेतुओं के टकराने का परिणाम नहीं था।
  • यह तत्व पृथ्वी के अस्तित्व के बिल्कुल शुरुआती समय से ही इसके कोर की संरचना का हिस्सा बन गया था।
  • यह हाइड्रोजन आज भी कोर के भीतर एक अत्यंत स्थिर और महत्वपूर्ण घटक के रूप में मौजूद हो सकता है।

यदि भविष्य के शोध इस परिकल्पना की पुष्टि कर देते हैं, तो यह हमारे ग्रह की आंतरिक रसायन शास्त्र की पूरी तस्वीर को बदल कर रख देगा। यह न केवल एक नया वैज्ञानिक तथ्य होगा, बल्कि पृथ्वी के विकासवादी इतिहास को फिर से लिखने जैसा होगा। यह खोज वैज्ञानिकों को उन रहस्यों को सुलझाने के करीब ले जाती है जो अरबों वर्षों से दबे हुए थे।

इस शोध का एक प्रमुख पहलू लंबे समय से चले आ रहे भू-भौतिकीय विवाद का समाधान करना है। वैज्ञानिक समुदाय में हमेशा से यह बहस का विषय रहा है कि पृथ्वी पर हाइड्रोजन कब और कैसे आया—क्या यह ग्रह के निर्माण के समय से मौजूद था या इसे बाद में बाहरी अंतरिक्षीय पिंडों द्वारा लाया गया? नए साक्ष्य अब स्पष्ट रूप से 'प्रारंभिक निर्माण' के सिद्धांत का समर्थन कर रहे हैं।

इसके अतिरिक्त, हाइड्रोजन की यह विशाल उपस्थिति मेंटल की गतिशीलता (mantle dynamics) को भी गहराई से प्रभावित करती है। हाइड्रोजन की मौजूदगी गहराई में स्थित परतों के भौतिक गुणों, जैसे कि उनके घनत्व और ऊष्मा को संचालित करने की क्षमता (thermal conductivity) में बदलाव ला सकती है। इसका सीधा असर पृथ्वी के भीतर होने वाली संवहन प्रक्रियाओं पर पड़ता है, जो ग्रह की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

कोर की संरचना और इन गहरे जलाशयों के बारे में मिली यह नई जानकारी हमें भविष्य की ज्वालामुखीय गतिविधियों को समझने में भी मदद करेगी। पृथ्वी के भीतर छिपे इन विशाल भंडारों का ज्ञान हमें दीर्घकालिक भू-गतिकीय प्रक्रियाओं (geodynamic processes) का अधिक सटीक और विश्वसनीय मॉडल तैयार करने में सक्षम बनाता है, जो आपदा प्रबंधन और भू-विज्ञान के लिए आवश्यक है।

यह एक अद्भुत विरोधाभास है कि पृथ्वी पर पानी या हाइड्रोजन का सबसे बड़ा संकेत इसकी सतह पर फैले नीले महासागरों में नहीं, बल्कि इसकी अगाध गहराइयों में छिपा है। यह न तो वायुमंडल की परतों में है और न ही ध्रुवों की बर्फ में, बल्कि हमारे पैरों के नीचे हजारों किलोमीटर गहराई में धधकते हुए पिघले हुए लोहे के सागर में समाया हुआ है।

यह शोध केवल आंकड़ों का एक संकलन मात्र नहीं है, बल्कि यह हमें याद दिलाता है कि हमारी पृथ्वी हमारी सोच से कहीं अधिक जटिल, रहस्यमयी और गतिशील है। हम जिस सतह पर रहते हैं, उसके नीचे छिपी दुनिया के रहस्य अभी भी हमें चकित करने की क्षमता रखते हैं।

अंत में, यह अध्ययन पृथ्वी की आंतरिक गूँज में एक गहरा और शांत स्वर जोड़ता है। यह हमें यह अहसास कराता है कि विशाल महासागर केवल हमारे बाहर ही नहीं फैले हैं, बल्कि ग्रह के हृदय में भी एक अनंत सागर हिलोरे ले रहा है, जो पृथ्वी के अस्तित्व की कहानी को और भी समृद्ध बनाता है।

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