वैज्ञानिकों ने पृथ्वी को सुनने का एक बिल्कुल नया और प्रभावी तरीका खोजा है—इंफ्रासाउंड (अवर ध्वनि) का उपयोग करके। ये वे ध्वनि तरंगें हैं जिनकी आवृत्ति मानव श्रवण सीमा से काफी नीचे होती है। ये शांत कंपन, जो एक तरह से ग्रह की श्वास या धड़कन की तरह महसूस होते हैं, अब सुनामी का जल्द पता लगाने और चेतावनी जारी करने के लिए एक महत्वपूर्ण साधन बन रहे हैं।
हाल ही में हुए शोध, जिनके निष्कर्ष *नेचर* और *साइंसडायरेक्ट* जैसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक मंचों पर प्रकाशित हुए हैं, बताते हैं कि मिस्र में वैज्ञानिक एक उन्नत चेतावनी प्रणाली का परीक्षण कर रहे हैं। यह प्रणाली वायुमंडलीय सेंसर, पानी के नीचे के डिटेक्टरों और उपग्रह डेटा को कुशलतापूर्वक जोड़ती है। यह बहु-घटक 'स्मार्ट त्रिकोण' किसी भी भूकंप या पानी के नीचे होने वाले भूस्खलन की आवाज को सुनामी की लहरों के तट से टकराने से पहले ही पकड़ने में सक्षम है।
इंफ्रासाउंड सिग्नल हवा में हजारों किलोमीटर की दूरी तक फैलने की क्षमता रखते हैं। जब पृथ्वी के नीचे कोई बड़ा विस्थापन या हलचल होती है, तो वायुमंडल एक विशिष्ट कम आवृत्ति वाले कंपन के साथ प्रतिक्रिया करता है। ट्यूनीशिया, जर्मनी और पूर्वी भूमध्य सागर में स्थापित स्टेशनों का एक व्यापक नेटवर्क पहले से ही पृथ्वी की इन सूक्ष्म फुसफुसाहटों को लगातार रिकॉर्ड कर रहा है। वे इन सिग्नलों के स्वरूप और उनकी उत्पत्ति की दिशा का गहराई से विश्लेषण करते हैं।
वैज्ञानिकों ने 2012 से 2023 के बीच आए 32 बड़े भूकंपों (जिनकी तीव्रता 5.5 या उससे अधिक थी) के डेटा का गहन अध्ययन किया। इस विश्लेषण ने निर्णायक रूप से यह सिद्ध किया है कि इंफ्रासाउंड तटीय क्षेत्रों को चेतावनी देने के लिए कुछ अतिरिक्त मिनट प्रदान कर सकता है। ये वे अमूल्य मिनट होते हैं जो आपदा की स्थिति में हजारों लोगों का जीवन बचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।
इस तकनीक की एक और दिलचस्प क्षमता यह है कि यह गैर-भूकंपीय घटनाओं को भी पकड़ने में सक्षम है। उदाहरण के लिए, पानी के नीचे होने वाले बड़े भूस्खलन या समुद्र तल से गैस का उत्सर्जन—ये ऐसी घटनाएं हैं जो बिना किसी प्रारंभिक भूकंपीय झटके के भी विनाशकारी सुनामी को जन्म दे सकती हैं। जो हलचलें पहले हमारी निगरानी से बाहर थीं, वे अब 'श्रव्य' हो गई हैं—भले ही वे केवल संवेदनशील उपकरणों के लिए ही सुलभ आवृत्तियों पर हों।
निकट भविष्य में, मिस्र की योजना है कि वह इंफ्रासाउंड तकनीक को अपनी राष्ट्रीय सुनामी चेतावनी प्रणाली में पूरी तरह से एकीकृत करे। इसके समानांतर, जर्मनी से लेकर भारत तक फैले अंतरराष्ट्रीय शोध समूह, इंफ्रासाउंड नेटवर्क के वैश्विक मानचित्र (ग्लोबल मैप्स) तैयार करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। उनका लक्ष्य एक ऐसा नेटवर्क बनाना है जिसके माध्यम से पृथ्वी सचमुच अपने निवासियों से 'बात' कर सके और उन्हें आने वाले खतरों के बारे में सूचित कर सके।
यह अदृश्य ध्वनि, जो समुद्र की गहराई और आकाश की ऊंचाई के बीच यात्रा करती है, हमारे ग्रह का एक महत्वपूर्ण संदेश है। यह हमें याद दिलाती है कि यदि हम ध्यान से सुनने की कला सीख लें, तो हमें खतरे को समझने और उससे निपटने का पर्याप्त समय मिल जाएगा, जिससे जीवन की रक्षा संभव हो सकेगी।




