🌍 Une image vaut 1000 mots… et une carte vaut 1000 images. Dans Notre empreinte sur Terre (Armand Colin), le journaliste scientifique Laurent Testot et le cartographe Perrin Remonté décryptent l’Anthropocène à travers cartes et infographies !
मानव जाति के पृथ्वी पर प्रभाव को दर्शाती नई पुस्तक 'नोट्रे एम्प्रिंट सुर टेरे' जारी होगी
द्वारा संपादित: Tetiana Martynovska 17
पत्रकार और इतिहासकार लॉरेंट टेस्टोट और मानचित्रकार पेरीन रेमोंटे सितंबर 2025 में "नोट्रे एम्प्रिंट सुर टेरे - डेस कार्टेस एट इन्फोग्राफिक्स पोर कॉम्प्रेंडर ल'एंथ्रोपोसीन" (पृथ्वी पर हमारा पदचिह्न - एन्थ्रोपोसीन को समझने के लिए नक्शे और इन्फोग्राफिक्स) नामक एक पुस्तक का विमोचन करेंगे। यह पुस्तक आर्मंड कोलिन द्वारा प्रकाशित की जाएगी और मानव जाति के ग्रह पर पड़ने वाले प्रभाव का एक दृश्य अन्वेषण प्रस्तुत करती है, जिसमें यह दर्शाया गया है कि हमारी गतिविधियों ने नक्शों और इन्फोग्राफिक्स के माध्यम से पर्यावरण को कैसे बदल दिया है।
टेस्टोट, जो अपनी पुस्तक "कैटैक्लिस्म्स। एक पर्यावरण इतिहास" के लिए जाने जाते हैं, और रेमोंटे, जो भूगोल को संवेदनशीलता और कविता के साथ प्रस्तुत करने की अपनी क्षमता के लिए पहचानी जाती हैं, एन्थ्रोपोसीन पर एक अनूठा दृष्टिकोण प्रदान करने के लिए सहयोग कर रही हैं। टेस्टोट इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि एन्थ्रोपोसीन वह "जादुई नुस्खा" है जिसके द्वारा मानव जाति ने पृथ्वी को बदल दिया है, हर जगह प्लास्टिक पेश किया है और जानवरों के वितरण को बदल दिया है। वे इस अवधारणा को हमारे पर्यावरण को नया आकार देने की हमारी क्षमता के प्रदर्शन के रूप में देखते हैं। वे आगे कहते हैं कि एन्थ्रोपोसीन हमारे मूल्यों और अस्तित्व की अनिवार्यता के अनुकूल "अच्छे एन्थ्रोपोसीन" पर विचार करने की भी अनुमति देता है, इस बात पर जोर देते हुए कि हम खुद के लिए और आने वाली पीढ़ियों के लिए पृथ्वी की रहने की क्षमता को खराब कर रहे हैं।
रेमोंटे बताती हैं कि नक्शों में उन अलग-अलग बिंदुओं और तत्वों को जोड़ने की शक्ति होती है जिन्हें हम आमतौर पर एक साथ नहीं देखते हैं। वे जटिल डेटा को संश्लेषित और समझने में सुविधा प्रदान करते हैं, जिससे पर्यावरणीय मुद्दों पर एक नया दृष्टिकोण मिलता है। यह पुस्तक हमें ग्रह पर हमारे प्रभाव के पैमाने के बारे में जागरूक होने और अधिक टिकाऊ भविष्य के लिए विकल्पों पर विचार करने के लिए एक निमंत्रण है। एन्थ्रोपोसीन, जिसे अक्सर मानव जाति के युग के रूप में वर्णित किया जाता है, पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ का प्रतिनिधित्व करता है। यह वह काल है जब मानव गतिविधियों ने ग्रह के भू-रासायनिक और भूभौतिकीय प्रणालियों पर एक प्रमुख शक्ति के रूप में कार्य करना शुरू कर दिया है।
हालांकि इसे एक औपचारिक भूवैज्ञानिक युग के रूप में मान्यता देने का प्रस्ताव विवादास्पद रहा है और इसे अंतर्राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक विज्ञान संघ द्वारा अस्वीकार कर दिया गया है, यह शब्द वैज्ञानिक और सामाजिक चर्चाओं में व्यापक रूप से स्वीकार किया गया है। यह मानव प्रभाव के पैमाने को दर्शाता है, जिसमें जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता का नुकसान और प्लास्टिक प्रदूषण जैसी घटनाएं शामिल हैं। कुछ लोग एन्थ्रोपोसीन की शुरुआत औद्योगिक क्रांति से जोड़ते हैं, जब जीवाश्म ईंधन के उपयोग ने बड़े पैमाने पर उत्पादन को बढ़ावा दिया और पर्यावरण पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला। अन्य लोग मध्य 20वीं शताब्दी को एक महत्वपूर्ण मोड़ मानते हैं, जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान परमाणु हथियारों के परीक्षण और उपयोग से चिह्नित है, जिसने मिट्टी के नमूनों में एक विशिष्ट रेडियोधर्मी निशान छोड़ा है। इस अवधि को "ग्रेट एक्सेलेरेशन" के रूप में भी जाना जाता है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वैश्विक जनसंख्या वृद्धि और तीव्र औद्योगिक विकास की विशेषता है।
नक्शे और इन्फोग्राफिक्स जैसे दृश्य उपकरण एन्थ्रोपोसीन की जटिलताओं को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे जटिल डेटा को सुलभ कथाओं में बदल सकते हैं, जिससे दर्शक पर्यावरणीय परिवर्तनों को अपने स्थानीय संदर्भ में समझ सकते हैं। उदाहरण के लिए, मानव पदचिह्न के नक्शे दर्शाते हैं कि कैसे मानव गतिविधियों ने पृथ्वी की सतह के लगभग 95% को संशोधित किया है, जिसमें 85% पर कई प्रकार के मानव प्रभाव के प्रमाण हैं। ये नक्शे जनसंख्या घनत्व, निर्मित वातावरण, रात की रोशनी, फसल भूमि, सड़कों और रेलवे जैसे कारकों को ट्रैक करते हैं। इन दृश्यों से पता चलता है कि मानव प्रभाव दुनिया भर के घनी आबादी वाले शहरी केंद्रों में विशेष रूप से स्पष्ट है, जैसे कि बोस्टन-वाशिंगटन गलियारा, यूरोप में "ब्लू बनाना" गलियारा, मिस्र में नील डेल्टा और जापान में ताइहेयो बेल्ट। ये दृश्य प्रतिनिधित्व हमें मानव जाति के ग्रह पर पड़ने वाले गहरे और स्थायी प्रभाव के बारे में एक स्पष्ट समझ प्रदान करते हैं।
स्रोतों
Geo.fr
Ouest-France
Renaud-Bray
L'Empreinte Podcast
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